सर्दियों में बर्फबारी के दीवानों के लिए स्वर्ग से कम नहीं नैनीताल

उत्तराखंड राज्य में घूमने के कई एेसे पर्यटन स्थल हैं, जिन्हें देखने के लिए हर साल भारी संख्या में सैलानी देवभूमि पहुंचते हैं। धार्मिक पर्यटन से लेकर साहसिक पर्यटन तक लुत्फ उठाने सैलानी यहां आते हैं। इन्हीं पर्यटन स्थलाें में से एक नैनीताल उत्तराखंड राज्य ही नहीं, बल्कि देश का भी एक प्रमुख पर्यटन स्थल है। कुमाऊं क्षेत्र में नैनीताल का विशेष महत्व है। अगर घूमने का छोटा सा प्लान बनाया हो या हनीमून के लिए कही जाना हो, तो सबसे पहले नैनीताल का नाम ही जेहन में आता है। गर्मियों में जहां नैनीताल की खूबसूरती और ठंडा मौसम सैलानियों को अपनी ओर खींच लाता है, वहीं सर्दियों में बर्फबारी और विंटर स्पोर्ट्स के दीवानों के लिए नैनीताल स्वर्ग बन जाता है। कहा जाता है कि एक समय में नैनीताल जिले में 60 से ज्यादा झीलें हुआ करती थीं। यहां चारों ओर खूबसूरती बिखरी है। सैर-सपाटे के लिए दर्जनों जगहें हैं, जहां जाकर पर्यटक मंत्र-मुग्ध हो जाते हैं।

नेनीताल में घुमने लायक जगह

नैनी झील
नैनी झील नैनीताल शहर के बीचों बीच बनी एक प्राकृतिक झील है। यहां के मनोरम दृश्य मनमोह लेने वाले होते हैं। अगर आप नैनीताल आते हैं, तो यहां बोटिंग का भी लुफ्त उठा सकते हैं।
स्नो फॉल और प्राकृतिक सुन्दरता
नैनीताल से करीब दो या ढ़ाई किलोमीटर की दूरी पर स्नो व्यू पॉइंट एक रमणीक स्थल है। सर्दियों में बर्फबारी और विंटर स्पोर्ट्स के दीवानों के लिए यह जगह स्वर्ग बन जाती है। यहां की प्राकृतिक खूबसूरती किसी को भी मोहित कर देती है। सुंदर झील और आसपास के मकान और होटल इस खूबसूरती को कई गुना बढ़ा देते हैं। यहां तक पहुंचने के लिए रोपवे से भी यात्रा कर सकते हैं। रोपवे कुल 705 मीटर की दूरी कवर करता है और प्रत्येक रोपवे कार में 12 व्यक्ति सवार हो सकते हैं।
खुर्पाताल
नैनीताल के पास ही खुर्पाताल भी है। खुर्पाताल झील के सम्मोहित कर देने वाले दृश्यों का आनंद लेने के लिए ‘लैंड्स एंड’ सबसे सही जगह है। यह नैनीताल के आस-पास की हरी-भरी घाटी के मनोहारी दृश्यों को भी देखने का मौका देता है।
सातताल
नैनीताल में 7 तालों की खूबसूरत जगह को ‘सातताल’ के नाम से जानते हैं। यह जगह नैनीताल से करीब 22 किलोमीटर की दूरी पर है। यहां आकर आप प्रकृति के स्पर्श को महसूस कर सकते हैं।
नैनीताल चिड़ियाघर
नैनीताल का चिड़ियाघर बस अड्डे से करीब एक किलोमीटर दूर है। इसका नाम उत्तर प्रदेश के पहले मुख्यमंत्री और स्वतंत्रता सेनानी गोविंद बल्लभ पंत के नाम पर रखा गया है। यहां बंदर से लेकर हिमालय का काला भालू, तेंदुए, साइबेरियाई बाघ, पाम सिवेट बिल्ली, भेड़िया, चमकीले तीतर, गुलाबी गर्दन वाले प्रकील पक्षी, पहाड़ी लोमड़ी, घोरल, हिरण और सांभर जैसे जानवर हैं। जू हर सोमवार और राष्ट्रीय अवकाश के मौके पर बंद रहता है।
नैनीताल का धार्मिक महत्व
स्कंद पुराण के मानस खंड में इसे ‘त्रि-ऋषि-सरोवर’ कहा गया है। ये तीन ऋषि अत्री, पुलस्थ्य और पुलाहा ऋषि थे। इस इलाके में जब उन्हें कहीं पानी नहीं मिला तो उन्होंने यहां एक बड़ा सा गड्ढा किया और उसमें मनसरोवर का पवित्र जल भर दिया। उसी सरोवर को आज नैनीताल के रूप में जाना जाता है। माना जाता है कि नैनी ताल में डुबकी लगाने का महत्व मानसरोवर में डुबकी लगाने जितना ही पवित्र है।
खाने में क्या प्रसीद्ध है
अगर आप खाने के शौक़ीन है तो नैनीताल आपके लिए बेस्ट है। यहां आप कुमाऊं की कई सारी डिशेज आजमा सकते हैं, जैसे पापड़ की सब्जी, झोली भात, भांग की चटनी, भथुए का परांठा, मद्वे की रोटी, रस भात, आलू के गुटके, कुमाऊंनी रायता, मडुए की रोटी, सिसौंण का साग, गहत की दाल, झिंगोरा या झुंअर की खीर, बाल मिठाई।
कैसे जाएं
यहां से निकटतम हवाई अड्डा पंतनगर नैनीताल से 71 किलोमीटर दूर है। यहां से दिल्‍ली के लिए उड़ानें मिलती हैं। पंतनगर हवाई अड्डे से टैक्सी या बस से यहां तक पहुंचा जा सकता है। जबकि नजदीकी रेलवे स्टेशन काठगोदाम यहां से 35 किलोमीटर की दूरी है। नैनीताल राष्ट्रीय राजमार्ग 87 से जुड़ा हुआ है। दिल्ली, आगरा, देहरादून, हरिद्वार, लखनऊ, कानपुर और बरेली से यहां के लिए नियमित बसें चलती हैं।

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