ऐसा क्या है स्पीति घाटी के ठंडे रेगिस्तान में जो खिंचे चले आते हैं पर्यटक

यूं तो हिमाचल प्रदेश के कई जगहें ऐसी हैं जो पर्यटन के लिए दुनिया भर में मशहूर हैं और साल भर सैलानियों की भीड़ लगी रहती है, लेकिन राज्य के ट्रांस-हिमालयन बेल्ट के अंदरूनी इलाकों में भी ऐसे प्राकृतिक नजारे भरे पड़े हैं जहां अलग तरह की जादुई दुनिया देखने को मिलती है। दूर तक फैसले सूखे, बंजर और कठोर पहाड हैं, तो कल-कल करती स्पीति नदी और उसके आसपास झीलें मन को मोह लेती है। ऊंचे-नीचे ढलानों पर पसरी हरियाली अपनी ओर आकर्षित करती है, तो स्पीति नदी के बहाव से बने गहरे-संकेरे रास्तों वाली स्पीति घाटी इससे भी ज्यादा खूबसूरत है।
चंद्रमा की आकृति वाले ढलान और पहाड़ों की तलहटी में बसे गांव और ऐतिहासिक गोम्पा यानी मठ स्पीति घाटी की शान हैं। यह घाटी कितनी मनमोहक, कितनी रूहानी सुकून देने वाली और सुंदर होगी, इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि खुद बौद्धों के सबसे बड़े धार्मिक नेता दलाईलामा भी यहां अक्सर समय गुजारना पसंद करते हैं।
यहां स्थित मठों के अंदर बौद्ध धर्म की उत्पत्ति के शुरुआती दिनों से संरक्षित कला, धार्मिक पुस्तकों और मूर्तियों के प्राचीन खजाने भरे पड़े हैं। समुद्र तल से 12,500 फीट की औसत ऊंचाई पर स्थित स्पीति में नाको-ताबो-काजा सर्किट पर अलग-अलग गांवों के आसपास के ऊबड़-खाबड़ प्राकृतिक परिदृश्य और रूरल एडवेंचर की चाह में निकले लोगों को निराश नहीं करता।
यहां की सबसे बड़ी शान, शांत बहती स्पीति नदी है, जहां जिंदगी के अलग-अलग रंग बिखरे हैं। सर्दियों की बर्फ पिघलने के बाद बंजर मैदान हरियाली चादर में तब्दील हो जाते हैं और यहां ग्रामीण इलाकों की जीवन रेखा समझे जाने वाले याक, भेड़ और बकरियां प्रकृति के गीत गाते हुए मस्त विचरते हैं।

यहीं की एक और खूबसूरत जगह प्राचीन गांव नाको है। यूं तो नाको गांव साल के बारहों महीने सुंदर लगता है, लेकिन सर्दियों में जब पहाड़ों के साथ तलहटी को भी बर्फ ढक लेती है तो यहां की छटां देखते ही बनती है। हालांकि सर्दी में यहां पहुंचना थोड़ा मुश्किल होता है।
इसी तरह एक और खूबसूरत जगह है टाबो घाटी में स्थित मंत्रमुग्ध कर देने वाला टाबो चॉस-खोर मठ या मोनेस्ट्री। यह भी पर्यटकों की पसंदीदा डेस्टिनेशन है। करीब एक हजार साल पुराने इस मठ को अद्भुत वास्तुशिल्प, अखंडता और आध्यात्मिक समृद्धि के लिए जाना जाता है। बेहतरीन शिल्पकला के कारण इसे हिमालय के अजंता के नाम से पुकारा जाता है।
करीब 13,000 फीट की ऊंचाई पर टाबो और काजा के बीच स्थित धनकर गांव के ऊपरी भाग पर बौद्ध धर्म के गेलुगा संप्रदाय से संबंधित प्राचीन और प्रसिद्ध धनकर गोम्पा मठ है। स्पीति और पिन नदियों के संगम पर स्थित यह मठ बेहद खूबसूरत है। इस मठ से बिना रुके एक घंटे का पैदल संकीर्ण रास्ता पहाड़ी की चोटी पर पहुंचता है। यहां से धनकर झील का मनोरम दृश्य मन को मोह लेता है। बर्फ से ढकी चोटियों का प्रतिबिंब जब क्रिस्टल की तरह साफ झील के पानी में पड़ता है तो किसी भी फोटोग्राफर के लिए क्लिक करने का यह सबसे अच्छा मौका होता है।
यहां एक और दर्शनीय चीज है। वह है स्पीति घाटी में कटोरे के आकार वाले क्षेत्र में पहाड़ों के बीच स्थित लांगजा गांव। लांगजा अपने समृद्ध जीवाश्म भंडार के लिए मशहूर है। लाखों साल पहले, स्पीति टेथिस समुद्र के नीचे डूबा हुआ था। यही कारण है कि समुद्र के जीवाश्म आसानी से गांव के करीब बिखरे हुए पाए जा सकते हैं। हिमालय के इतिहास की खोज में आने वाले पर्यटकों के लिए यहां जीवाश्म भ्रमण कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।

कैसे पहुंचेः
स्पीति घाटी दिल्ली से करीब 734 किलोमीटर दूर है। दिल्ली से बस और हवाई मार्ग से शिमला या मनाली पहुंचा जा सकता है। वहां से बस लेकर स्पीति घाटी के मुख्यालय काजा पहुंचेंगे।

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