स्वाद और सेहत का खजाना है उत्तराखंड का स्वादिष्ट गढ़वाली भोजन

गढ़वाल देवभूमि उत्तराखंड का प्रमुख क्षेत्र है। यहां गढ़वाली और हिन्दी भाषा बोली जाती है। गढ़वाल का साहित्य तथा संस्कृति बहुत समृद्ध है। यहां की संस्कृति से लेकर खान-पान की आदतों तक में इंडो-आर्यन और इंडो-ईरानी सभ्यता का मेल नजर आता है। यहां का गढ़वाली लोकनृत्य बहुत ही प्रसिद्द है। गढ़वाली लोकनृत्यों के 25 से अधिक प्रकार पाए जाते हैं। लोकनृत्य के अलावा यहां का खाना भी काफी लोकप्रिय है। आइये डालते हैं एक नजर गढ़वाल के कुछ खास और प्रचलित पकवान और व्यंजनों पर।

भांग की चटनी : इस क्षेत्र में सभी तरह के भोजन के साथ भांग की चटनी खाई जाती है। इसका खट्टा-नमकीन-तीखा फ्लेवर भोजन को और स्वादिष्ट बनाता है।

गहत के परांठे : अगर आप गढ़वाल में हो, तो आप देखोगे कि यहां के लोग सुबह के नाश्ते में गहत की दाल के परांठे खाना पसंद करते हैं। पहाड़ी मौसम को देखते हुए गहत के परांठे स्वाद और सेहत का खजाना हैं। इसे भांग की चटनी के साथ भी खाया जाता है। कई लोग गहत की दाल को भूनकर भी खाना पसंद करते हैं।

जखिया में भुने हुए चावल : गढ़वाल के लोग रोटी की जगह चावल खाना ज्यादा पसंद करते हैं। आम दिन हो या कोई खास दिन, यहां के लोग जखिया में भुने हुए चावल खाना पसंद करते है। जखिया सरसों की ही तरह दिखने वाला एक तरह का बीज होता है। चावल पकाने के बाद उसे जखिया के साथ भूना जाता है। यह चावल को स्वादिष्ट बनाने के साथ ही कुरकुरा बना देता है।

काफली : जब मौसम में ठंडक बढ़ जाती है, तो गढ़वाल के लोग काफली खाना पसंद करते है। यह गढ़वाल का एक पारंपरकि और लोकप्रिय व्यंजन है। इसे बनाने के लिए उबले हुए पालक के पत्तों को पूरी तरह मैश न करके सामान्य ही रखा जाता है।

अरसा : यह गढ़वाल का एक पारंपरिक मीठा पकवान है। यहां की शादियों में खास तौर पर इसे बनाया जाता है। इसे बनाने के लिए पहले चावल को आटे की तरह बारीक पिसा जाता है। फिर इसमें पिघले हुए गुड़ को मिलाया जाता है और उसे बिस्किट के आकार में काटकर तेल या घी में फ्राई किया जाता है।

काछमौली : गढ़वाल में नॉनवेज खाने वाले काछमौली खाना बहूत पसंद करते हैं। मटन से बनने वाला काछमौली खूब तीखा और मसालेदार होता है। इसे बनाने से पहले मटन को अच्छी तरह भुना जाता है। इसमें ग्रेवी को कम रखा जाता है।

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