प्राकृतिक सुंदरता और ऐतिहासिक मंदिर, चंपावत में मिलती है असीम शांति

बर्फ से ढके पहाड़, दूर तक फैली हरियाली, प्राकृतिक सुन्दरता और हर दो कदम पर मंदिर, जी हां यही तो खासियत है देवभूमि उत्तराखंड की। उत्तराखंड आने वाले पर्यटकों को प्राकर्तिक सौंदर्य के साथ धार्मिक पर्यटन की सौगात भी मिलती है। ऐसी ही एक जगह है उत्तराखंड में ‘चंपावत’। 1631 वर्ग किलोमीटर में फैले इस जिले की सीमा नेपाल, उधम सिंह नगर, नैनीताल और अल्मोड़ा से लगती है। प्रकृति की गोद में बसे चंपावत का अपना ऐतिहासिक और पौराणिक महत्व है। प्राकृतिक सुदंरता से भरपूर चंपावत अपने आकर्षक मंदिरों और खूबसूरत वास्तुशिल्प के लिए दुनिया भर में प्रसिद्ध है। चंपावत आने वाले पर्यटक यहां के ऐतिहासिक मंदिरों के साथ साथ वन्यजीवों से लेकर हरे-भरे मैदानों और ट्रैकिंग का लुत्फ उठा सकते हैं।

धार्मिक महत्व

चंपावत का अपना पौराणिक महत्व है। वायु पुराण में चंपावत को चंपावतपुरी कहा गया है। यह नागवंशीय नौ राजाओं की राजधानी थी। वहीं स्कंद पुराण में चंपावत को कुर्मांचल कहा गया है। मान्यता है कि इसी क्षेत्र में भगवान विष्णु ने कुर्म (कछुए) का अवतार लिया था। चंपावत का महाभारत काल से भी सम्बन्ध है। स्थानीय लोगों का मानना है कि यह महाबली भीम के पुत्र “घटोत्कच” का निवास स्थान था। अपने 14 वर्ष के निर्वासन के दौरान पांडवों ने कुछ समय यहां भी बिताया था। माना जाता है कि यहां बने मंदिरों का निर्माण द्वापर युग में किया गया था।

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार भगवान राम ने रावण के भाई कुम्भकर्ण को मारने के बाद उसके सर को यहीं फेंका था। इसके अलावा यह भी माना जाता है कि द्वापर युग में भगवान कृष्ण ने यहीं पर अपने पौत्र का अपहरण करने वाले वाणासुर दैत्य का वध किया था।

क्रांतेश्वर महादेव मंदिर

भगवान शिव का यह मंदिर चंपावत से 6 किलोमीटर की दूरी पर है। यह मंदिर अपनी अनोखी वास्तुशिल्प के लिए प्रसिद्द है। मंदिर के आसपास बर्फ से ढके पहाड़ इसकी खूबसूरती को कई गुना बढ़ा देते है।

बालेश्वर महादेव मंदिर

भगवान शिव के इस मंदिर का निर्माण चांद शासक ने करवाया था। इस मंदिर की छत और मंडप पर की गई नक्काशी इसकी खूबसूरती में और भी ईजाफा कर देती है।

मीठा-रीठा साहिब

चंपावत से करीब 72 किलोमीटर दूर सिक्खों का पवित्र धार्मिक स्थल है मीठा-रीठा साहिब। मान्यता है कि इस जगह पर गुरू नानक देव जी आये थे। उनके स्पर्श से ही यहां मौजूद रीठे के पेड़ मीठे हो गए थे। इस गुरुद्वारे के नामकरण के पीछे यहीं कहानी है।

कैसे पहुंचे चंपावत

चंपावत जाने के लिए नैनीताल के अलावा आसपास के कई शहरों से लग्जरी और सामान्य बसें मिलती है। आप चाहें तो पिथौरागढ़ से भी चंपावत के लिए बस ले सकते हैं। आप ट्रेन से सीधे चंपावत नहीं पहुंच सकते। इसके लिए आपको 74 दूर टनकपुर रेलवे स्टेशन उतरना होगा। यह स्टेशन लखनऊ, शाहजहांपुर और पीलीभीत से कुछ ट्रेनों से जुड़ा हुआ है। टनकपुर से चंपावत के लिए बस या कैब मिलती है। इसके अलावा आप रेल मार्ग से काठगोदाम भी जा सकते हैं और फिर यहां से कैब बुक कर चंपावत पहुंच सकते हैं। चंपावत से निकटतम हवाईअड्डा 80 किलोमीटर दूर पिथौरागढ़ का नैनी सैनी एयरपोर्ट है। एयरपोर्ट से चंपावत के लिए आसानी से टैक्सी मिल जाती है।

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