बारिश से आदि कैलाश यात्रा रुकी, चारधाम के लिए भी 15 दिन से रास्ता खुलने का इंतजार

हर साल होने वाली आदि कैलाश की तीर्थयात्रा में बारिश ने खलल डाल दिया है। लगातार खराब मौसम के कारण उत्तराखंड सरकार ने बीते शनिवार को यात्रा रोकने का फैसला किया है। भारी बारिश से गरबाधर, मालपा और नजांग के बीच की सड़कें बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई हैं।
वार्षिक तीर्थयात्रा कुमायूं विकास मंडल निगम द्वारा संचालित होती है। इस साल यात्रा के लिए 400 लोगों ने पंजीकरण कराया था, जिनमें से 179 तीर्थयात्रियों ने दर्शन कर लिये हैं। प्रशासन के एक अधिकारी के मुताबिक यात्रा रोकने के निर्णय के बारे में विदेश मंत्रालय को पत्र भेजा गया है।
आदि कैलाश धारचूला जिले में 6,191 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है और इसे ओउम् आकार के समान माना जाता है। यानी पत्थरों से प्राकृतिक रूप से ही यहां ओउम् लिखा हुआ है। यहां की तीर्थ यात्रा जून और अक्टूबर के बीच होती है, जिसे पूरा होने में 12 दिन लगते हैं।
पिछले पखवाड़े में उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्रों में भारी वर्षा से बद्रीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री और यमुनोत्री की चारधाम यात्रा सहित कई वार्षिक तीर्थयात्राओं में बाधा आ रही है। यहां 15 दिन से भक्त रास्ता खुलने का इंतजार कर रहे हैं। यमुनोत्री हाईवे और बदरीनाथ मार्ग पर मलबा गिर गया है।
बीते शनिवार सुबह शिवपुरी में मलबा आने से बदरीनाथ हाईवे भी ठप पड़ गया। सड़क पर दोनों तरफ गाड़ियों की लंबी-लंबी कतारें लग गई हैं। यमुनोत्री धाम की यात्रा पर पहुंच रहे तीर्थयात्रियों और गीठ-बजरी पट्टी के लोगों को बहुत परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
ओजरी-डबरकोट स्लाइड जोन में फिर भूस्खलन शुरू होने से कड़ी मशक्कत के बाद खोले गए रास्ते में दोबारा भारी मलबा जमा हो गया है। जंगल चट्टी में धंसाव के चलते क्षतिग्रस्त हुए मार्ग को ठीक करने गए एनएच के कर्मचारियों को लगातार गिर रहे पत्थरों के कारण पीछे हटना पड़ा। बीते 21 जुलाई को बंद हुए यमुनोत्री हाईवे पर जल्द यातायात बहाली की उम्मीद कम ही है।

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