गोमती किनारे बसा है हजार साल पुराना भगवान शिव का भव्य बैजनाथ मंदिर

पूरे देश में इस समय श्रावण महीने की धूम है। भगवान शिव के भक्त बोल बम, हर-हर महादेव का नारा लगाते हुए भगवान की भक्ति के लिए शिवालयों में जा रहे हैं। देशभर के शिवालयों में भक्तों की भीड़ उमड़ रही है। शिवालयों में प्रतिदिन पूजा-अर्चना के साथ-साथ अभिषेक अनुष्ठान हो रहे हैं। हिन्दू धर्म में सावन महीने को बड़ा ही पवित्र माना जाता है। इस अवसर आज हम आपको उत्तराखंड राज्य के बागेश्वर जिले के गरुड़ तहसील में स्थित भगवान शिव के प्रसिद्ध मंदिर “बैजनाथ मंदिर” के बारे में जानकारी देने वाले हैं।

कौसानी से 16 किलोमीटर दूर गोमती नदी के तट पर स्थित बैजनाथ शहर में बसा यह मंदिर धार्मिक आस्था का महत्वपूर्ण केन्द्र है। यहां साल भर भक्तों का आना-जाना लगा रहता है, लेकिन सावन महीने में भक्तों की भारी भीड़ यहां उमड़ती है। विशाल पाषण शिलाओं से बना बैजनाथ मंदिर लगभग 1000 साल पुराना है। इस मंदिर के बारे में कहते हैं कि यह सिर्फ एक रात में बनाया गया था। स्थानीय लोगों का मानना है कि यहां पर भगवान शिव और माता पार्वती ने गोमती व गरुड़ गंगा नदी के संगम पर विवाह रचाया था। यहां भगवान शिव, गणेश, पार्वती, चंडिका, कुबेर व सूर्य मंदिर हैं। यहां पत्थर के बने कई मन्दिर हैं। बैजनाथ मंदिर 1984 से पुरातत्व विभाग के संरक्षण में है।

64 फीट ऊंचा यह मंदिर अपनी भव्यता के लिए भी प्रसिद्द है। माना जाता है कि कोई तपस्वी अपने तपोबल से इसे उड़ाकर ले जा रहा था, लेकिन सूर्योदय होने के कारण उसे मंदिर यहीं स्थापित करना पड़ा। स्थानीय लोगों के अनुसार बैजनाथ मंदिर में पूजा करने का अंत्यत महत्व है। मान्यता है कि शिवलिंग के दर्शन मात्र से लोगों की मनोकामना पूरी हो जाती है।

यहां हर साल चैत्र पक्ष की अमावस्या को मेला लगता है। सावन के माह में यहां भक्तों की भारी भीड़ जुटती है। देश के कोने-कोने से शिवभक्तों को यह मंदिर आकर्षित करता है। कई विदेशी पर्यटक भी यहां आते हैं। सोमवार को भगवान शिव की विशेष पूजा होती है। बैजनाथ को पहले “कार्तिकेयपुर” के नाम से जाना जाता था। यह 12वीं और 13वीं शताब्दी में कत्यूरी वंश की राजधानी हुआ करती थी। बागेश्वर में स्थित बैजनाथ मंदिर के साथ साथ बागनाथ मंदिर के भी दर्शन जरूर करने चाहिए क्योंकि यह मंदिर भी एक पौराणिक धार्मिक स्थल है।

कैसे पहुंचे बैजनाथ मंदिर

यहां से निकटतम हवाई अड्डा 184 किलोमीटर दूर पंतनगर में स्थित है। वहीं निकटतम रेलवे स्टेशन 149 किलोमीटर दूर काठगोदाम में है। दोनों से जगहों से बैजनाथ जाने के लिए आपको बस का या किराए के वाहन का सहारा लेना पड़ेगा। उत्तराखंड परिवहन निगम की ‘कुमाऊं दर्शन’ बस सेवा द्वारा हल्द्वानी, भीमताल, अल्मोड़ा और रानीखेत से बैजनाथ जुड़ा हुआ है।

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