शिमला के हसीं नजारों के बीच स्थित है प्रसिद्ध संकट मोचन मंदिर

अपनी प्राकृतिक खूबसूरती के लिए दुनियाभर में मशहूर हिमाचल प्रदेश की राजधानी शिमला की सुरम्य वादियों के बीच भगवान हनुमान को समर्पित प्रसिद्द संकट मोचन मंदिर स्थित है। समुद्र तल से ऊपर 1975 मीटर की ऊंचाई पर स्थित यह लोकप्रिय धार्मिक स्थल कालका-शिमला राजमार्ग पर मौजूद है। संकट मोचन मंदिर से शिमला टाउन और शक्तिशाली हिमालय पर्वतमाला के खूबसूरत नज़ारे देखने को मिलते हैं। संकट मोचन मंदिर के बारे में माना जाता है कि इसकी स्थापना ‘बाबा नीब करोरी जी महाराज’ ने साल 1966 में की थी। दरअसल ‘बाबा नीब करोरी जी महाराज’ ने साल 1950 में इस क्षेत्र का दौरा किया था। इस दौरान वह यहां की खूबसूरती से बहुत प्रभावित हुए थे।

आगे चलकर प्रशासन ने इस मंदिर का विस्तार किया। पहले यहां सिर्फ हनुमान मंदिर था, लेकिन बाद में यहां राम-सीता-लक्ष्मण, गणपति और शंकर जी की स्थापना भी की गई। गणेश मंदिर की डिजाइन दक्षिण भारतीय वास्तुकला शैली को प्रदर्शित करती है। यह जगह इतनी शांत और सुंदर है कि यहां पहुंच कर आपके कष्ट और संकट अपने-आप ही दूर होते महसूस होने लगते हैं। यहां हर रोज बड़ी संख्या में श्रद्धालु पधारते हैं। शिमला आने वाले ज्यादातर पर्यटक संकट मोचन मंदिर आकर भगवान के दर्शन जरुर करते हैं। हनुमान मंदिर होने के कारण मंगलवार और शनिवार को यहां आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या अन्य दिनों के मुकाबले अधिक होती है। रविवार को यहां काफी बड़े स्तर पर भंडारे का आयोजन किया जाता है। मंदिर परिसर में ही बाबा नीब करौरी जी का भी एक छोटा-सा मंदिर है, जो कुछ साल पहले ही बना है।

पौराणिक कथा

संकट मोचन मंदिर को लेकर श्रद्धालुओं की मान्यता है कि भगवान राम और रावण के बीच युद्ध के दौरान जब लक्ष्मण जी मूर्छित हो गए और भगवान हनुमान संजीवनी बूटी लेने गए तो वह यहां आकर रास्ता भटक गए थे। इसी स्थान पर आकर भगवान हनुमान ने आगे का रास्ता देखा था और इसी मंदिर के ठीक सामने अपना अगला कदम जाखू पर्वत पर रखा था। जाखू पर्वत पर प्रसिद्द जाखू मंदिर स्थित है। यहीं रुककर हनुमान जी ने अपनी वानर सेना के साथ विश्राम किया था।

कैसे पहुंचें संकट मोचन मंदिर

यह धार्मिक स्थल सड़क मार्ग से शिमला जाते हुए करीब 5 किलोमीटर पहले ही आता है। शिमला सड़क मार्ग द्वारा सीधे दिल्ली, चंडीगढ़ और दूसरे बड़े शहरों से जुड़ा हुआ है। यहां से नजदीकी रेलवे स्टेशन कालका का ब्रॉड गेज स्टेशन है। देश के प्रमुख शहरों जैसे दिल्ली, मुंबई, अंबाला, भिवानी, शिर्डी, बारमेर और कोलकाता से कालका रेलवे स्टेशन के लिए रेल गाड़ियां उपलब्ध हैं। कालका ब्राड गेज का आखिरी रेलवे स्टेशन है। कालका से शिमला के बीच छोटी रेलवे लाइन पर कालका-शिमला रेल चलती है। कालका-शिमला रेल सैलानियों की खास पसंद है, क्योंकि इस ट्रेन से शिमला की हसीन वादियों के नजारे देखने को मिलते हैं। संयुक्त राष्ट्र की संस्था यूनेस्को ने इसे विश्व धरोहर घोषित कर रखा है। शिमला से निकटतम हवाई अड्डा 25 किलोमीटर दूर ‘जुब्बरहट्टी हवाई अड्डा’ है। जुब्बरहट्टी हवाई अड्डे के लिए दिल्ली और चंडीगढ़ से फ्लाइट मिलती है।

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