प्राकृतिक सौंदर्य से परिपूर्ण है सतोपंथ ताल, यहां ब्रह्मा-विष्णु-महेश ने की थी तपस्या

देवभूमि उत्तराखंड में बद्रीनाथ धाम से लगभग 21 किलोमीटर दूर प्राकृतिक झीलों में से एक सतोपंथ ताल है। समुद्र तल से 4600 मीटर की ऊंचाई पर मौजूद सतोपंथ ताल एक त्रिकोणीय झील है। इस झील की खूबसूरती देखते ही बनती है। अपने अद्वितीय प्राकृतिक सौन्दर्य के अलावा इस झील का धार्मिक महत्व भी है। अन्य प्राकृतिक झीलों से अलग सतोपंथ ताल का आकार त्रिभुजाकार है। माना जाता है कि इस झील के तीनो कोनों में भगवान ब्रह्मा, विष्णु, महेश ने तपस्या की थी। इस ताल की खूबसूरती पर्यटकों को अपनी ओर आकर्षित करती है। यहां की प्राकृतिक खूबसूरती के बीच आकर अद्भुत शांति का अनुभव होता है।

सतोपंथ झील उत्तराखंड का एक प्रसिद्ध ट्रेकिंग और कैम्पिंग स्थल भी है। चौखंबा शिखर की तलहटी पर स्थित सतोपंथ झील एक हिमरूप झील है। यह उत्तराखंड की सुरम्य झीलों में से एक है। इस झील के नाम सतोपंथ का मतलब है ‘सत्य का रास्ता’, ‘सतो’ यानि सत्य और ‘पंथ’ यानि ‘रास्ता’। सतोपंथ झील से जुड़ी कथाओं के अनुसार महाभारत काल के दौरान पांडव इसी ‘स्वर्ग के रास्ते’ से होते हुए स्वर्ग की ओर गए थे। यही कारण है कि इस झील का नाम सतोपंथ झील पड़ गया। इसे धरती पर स्वर्ग जाने का रास्ता भी कहा जाता है। स्वर्ग जाने से पहले पांडवों ने यहां स्नान भी किया था। इसीलिए इस झील का हिन्दू धर्म के लोगों के बीच खास महत्व है।

एक अन्य मान्यता के अनुसार एकादशी के दिन भगवान ब्रह्मा, विष्णु, महेश यहां आए थे और उन्होंने झील के अलग-अलग कोनों में डुबकी लगाई थी। इसलिए कहा जाता है कि यह झील त्रिभुज के आकार में है। अभूतपूर्व प्राकृतिक खूबसूरती और धार्मिक महत्व के अलावा यह क्षेत्र ट्रेकिंग के लिए भी काफी प्रसिद्द है। बर्फ से ढकी चोटियों के बीच यहां ट्रेकिंग करना काफी रोमांचक होता है। यहां की अनछुई खूबसूरती किसी का भी मन मोह लेने के लिए काफी है। हालांकि यहां ट्रेकिंग करते समय काफी कई मुश्किल पड़ावों से गुज़ारना पड़ता है। यह ट्रेक माणा गांव से शुरू होता हुआ वसुधारा घाटी से गुज़रता है।

कैसे पहुंचें सतोपंथ झील

सतोपंथ झील जाने के लिए इनर लाइन परमिट के लिए आवेदन करना होता है, क्यूंकि यह भारत-तिब्बत सीमा के नज़दीक स्थित है। सतोपंथ झील तक केवल ट्रेकिंग मार्ग द्वारा ही पहुंचा जा सकता है। माणा गांव से ट्रेकिंग करके सतोपंथ झील तक पहुंचा जाता है। माणा गांव बद्रीनाथ से मात्र तीन किलोमीटर की दूरी पर है। ऐसे में बद्रीनाथ आने वाले भक्त यहां आसानी से पहुंच सकते हैं। NH58 के जरिए श्रद्धालु हरिद्वार और ऋषिकेश से माणा गांव तक पहुंचते हैं। माणा गांव से नजदीकी रेलवे स्टेशन लगभग 320 किलोमीटर दूर हरिद्वार और निकटतम हवाई अड्डा 340 किलोमीटर दूर देहरादून में स्थित है।

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