गर्मियों के दिनों में करें चन्द्रशिला की सैर, कहा जाता है मिनी स्विट्जरलैंड


गर्मियों के दिनों में हर कोई ऐसी जगह पर घूमने का प्लान करता है, जहां तपती गर्मी से छुटकारा मिल सके। उत्तराखंड एक ऐसी जगह है जहां आप साल के हर महीने घूमने के लिए जा सकते हो। उत्तराखंड के रूद्रप्रयाग जिले में​ स्थित चन्द्रशिला मंदिर अपनी खूबसूरती के लिए जाना जाता है। अगर आप ट्रेकिंग के शौकीन हो तो उत्तराखंड में यह जगह आपके लिए बेस्ट है। ऐसे में आज हम चन्द्रशिला मंदिर से जुड़ी खास बातों के बारे में बताने जा रहे हैं।

  • रूद्रप्रयाग जिले में स्थित चन्द्रशिला मंदिर समुद्र तल से 4000 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। यहां मौसम साल के बारह महीने ठंडा रहता है। गढ़वाल की हिमालय पर्वतमाला में स्थित रूद्रप्रयाग का धार्मिक महत्व भी है।
  • चन्द्रशिला, उत्तराखंड में बद्रीनाथ और केदारनाथ के बीच बसी एक छोटी-सी चोटी है, इस जगह से हिमालय पर्वत साफ दिखाई देता है।
  • तुंगनाथ से तकरीबन 2 किलोमीटर की खड़ी पहाड़ी पर चन्द्रशिला मंदिर स्थित है। तुंगनाथ को उत्तराखंड का स्विट्जरलैंड भी कहा जाता है।
  • चन्द्रशिला से नंदा देवी, त्रिशूल, केदार, बंदरपूंछ और चौखम्बा की चोटियों को साफ देखा जा सकता है।
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इस वजह से है मान्यता

  • पौराणिक मान्यतओं के अनुसार भगवान राम ने राक्षसों के राजा रावण को जीतने के बाद मन की शांति के लिए चन्द्रशिला पर आकर तप किया था।
  • एक ओर भी मान्यता है कि चन्द्र देवता यहीं पर आकर धरती से मिले थे। इससे 2 किलोमीटर नीचे भगवान शिव को समर्पित तुंगनाथ मंदिर है।
  • माना जाता है की तुंगनाथ मंदिर का निर्माण पाण्डवों द्वारा भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए किया गया था, जो कुरुक्षेत्र में हुए नरसंहार के कारण पाण्डवों से रुष्ट थे।
  • इस मंदिर के बारे में कहा जाता है कि पार्वती माता ने शिव जी को प्रसन्न करने के लिए यहां शादी से पहले तपस्या की थी।
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कैसे पहुंचें –

  • दिल्ली से चन्द्रशिला की दूरी तकरीबन 417 किलोमीटर है, जहां दिल्ली से ऋषिकेश (230 किलोमीटर) होते हुए चोपता (180 किलोमीटर) पहुंचा जा सकता है।
  • चन्द्रशिला तक पहुंचने का रास्ता चोपता से शुरू होता है। जिसके बाद तुंगनाथ तक 5 किलोमीटर की दूरी तय करनी पड़ती है।

ट्रेकिंग का सही समय

  • मार्च से नवंबर के समय तक यहां पर यात्रा की जा सकती है। हालांकि बाकि महीने भी की जा सकती है। लेकिन बर्फ गिरने के कारण यह रास्ता और भी दुर्गम हो जाता है।
  • जनवरी व फरवरी के महीने में भी यहां काफी बर्फ काफी पड़ती है, जिस वजह से भी पर्यटक घूमने आते हैं।
  • ब्रिटिश शासनकाल में कमिश्नर एटकिन्सन ने कहा था कि जिसने अपने जीवन में चोपता नहीं देखा, उसका जीवन व्यर्थ है।

 

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