खूबसूरत धर्मशाला में पर्यटक उठा सकते हैं ट्रेकिंग व पैराग्लाइडिंग का लुफ्त

हिमाचल प्रदेश एक बेहद ही खूबसूरत होलीडे डेस्टिनेशन है,जो देश-विदेश के सैलानियों को आकर्षित करता है। हिमाचल में बर्फबारी, रोमांचक खेलों के साथ ट्रेकिंग का भी लुफ्त उठाया जा सकता है। घूमने या सैरसपाटे की जब भी बात आती है तो शहरी आपाधापी से दूर पहाड़ों की अालाैकिक सुंदरता सब को अपनी ओर आकर्षित करती है। हिमालय की दिलकश, बर्फ से ढकी चोटियों, चारों ओर हरे भरे खेत, हरियाली और कुदरती सुंदरता के लिए सैलानी कांगड़ा से 17 किलोमीटर की दूरी पर स्थित धर्मशाला को पर्यटन की दृष्टि से परफैक्ट डैस्टिनेशन के रूप में जाना जाता है।

धर्मशाला शहर बहुत छोटा है और टहलते-घूमते इस क्षेत्र की सैर दिन में कई बार करना चाहेंगे। यह शहर दो हिस्सों में बंटा हुआ है। शहर के पहले हिस्से को लोअर धर्मशाला और दूसरे को अपर धर्मशाला, यानी मैक्लोडगंज कहा जाता है। धर्मशाला तीन ओर से धौलाधार पर्वत से घिरा है। तिब्बती धर्म गुरू दलाई लामा ने निर्वासन के समय से ही मैक्लोडगंज को उनका अस्थायी निवास बनाया है। धार्मिक भाव रखने वाले लोगों के लिए यह पसंदीदा जगह है। कांगड़ा जिला अपने प्राचीन मंदिरों के लिए मशहूर है। एडवेंचर खेलों की चाह रखने वालों और प्रकृति प्रेमियों के लिए यह जगह स्वर्ग से कम नहीं है।

मनोरम अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट स्टेडियम
धर्मशाला में देश का सबसे खूबसूरत क्रिकेट स्टेडियम मौजूद है। यह भारत का सबसे ऊंचाई पर स्थित स्टेडियम है। 2005 में बनकर तैयार हुए इस स्टेडियम में आईपीएल, टेस्ट व वनडे मैचों का आयोजन हो चुका है। यहां दर्शकों के बैठने की क्षमता 25 हजार है।

ट्रेकिंग की बेहतरीन जगह
धौलाधर की पहाडियाें में ट्रेकिंग, पैराग्लाइडिंग और रॉक क्लाइंबिंग के लिए धर्मशाला बेस पॉइंट है। अगर यहां के ट्रेकिंग ट्रेल्स की बात करें, तो धर्मशाला के आसपास त्रिउंड, करेरी विलेज, करेरी लेक, आदि हिमानी चामुंडा देवी, राइजिंग स्टार, मूनपिक पॉइंट आदि बेहतरीन जगहें हैं। ट्रेकिंग के दौरान धौलाधार और कांगड़ा वैली की हरियाली देखने लायक होती है।


कब जाएं
वैसे तो यहां साल भर आ सकते हैं, पर सबसे उपयुक्त समय मार्च से जून और अक्टूबर से जनवरी है। इस दौरान यहां का मौसम काफी सुहावना होता है। इस दौरान ट्रेकिंग का लुफ्त भी उठा सकते हैं।

मैक्लोडगंज
पहाड़ी पर बसा यह खूबसूरत टाउन धर्मशाला से तकरीबन 10 किलोमीटर की ऊंचाई पर स्थित है। इसका नाम ब्रिटिशकाल में पंजाब के लेफ्टिनेंट गवर्नर सर डोनाल्ड मैक्लोड के नाम पर पड़ा। गंज का अर्थ हिंदी व उर्दू में आस-पड़ोस होता है। तिब्बतियों की अधिकता के कारण मैक्लोडगंज को ‘मिनी ल्हासा’ भी कहा जाता है। तिब्बती सर्वोच्च धर्म गुरू दलाई लामा का आवास भी यहीं है। तिब्बती कला व संस्कृति से रूबरू होने के लिए मैक्लोडगंज बेहतरीन जगह है।

कुनाल पथरी
धर्मशाला मेन बस स्टैंड से करीब तीन किमी दूरी पर स्थित कुनाल पथरी में ज्यादातर टूरिस्ट पैदल घूमते हुए आना पसंद करते हैं। यहां का मुख्य आकर्षण रॉक टेंपल है। धौलाधार की पहाडिय़ों की मनोरम छठा में चाय बागानों के बीच स्थित मां कुनाल पत्थरी मंदिर कपालेश्वरी के नाम से विख्यात है। मां कपालेश्वरी देवी मंदिर अनूठा और विशेष भी है। यहां पर मां के कपाल के ऊपर एक बड़ा पत्थर भी कुनाल की तरह विराजमान है। इसलिए इसे कुनाल पथरी के नाम से भी जाना जाता है।

सेंट जॉन चर्च
घने पेड़ों से घिरा यह चर्च 1863 में निर्मित हुआ था। चर्च से नड्डी की ओर बढऩे पर रास्ते में ही डल झील है। देवदार के वृक्षों से घिरा यह एक खूबसूरत पिकनिक स्थल भी है। यह स्थान ब्रिटिश सरकार के समय में तत्कालीन वॉयसराय ऑफ इंडिया लॉर्ड एल्गिन को काफी पसंद था। यहीं उनका निधन भी हुआ था। अगर आप धर्मशाला से मैक्लोडगंज जा रहे हैं, तो रास्ते में कुछ पल इस चर्च पर भी बिता सकते हैं। यहां प्राचीन चर्च के अलावा अंग्रेज वायसराय लार्ड एल्गिन का स्मारक भी है।

करेरी झील
अगर आप रोमांच के शौकीन हैं, तो इस झील तक जा सकते हैं। ओक और देवदार के पेड़ व झील के आसपास की हरियाली ट्रेकिंग के शौकीनों को अपनी और खींचती है। करेरी झील, समुद्र तल से 2934 मीटर की ऊंचाई पर स्थित, कांगड़ा में एक लोकप्रिय पर्यटन स्थल है। धौलाधार रेंज से पिघलती बर्फ इस झील को भरती है। धर्मशाला से 9 किमी की दूरी पर स्थित इस झील से एक सुंदर ट्रैकिंग मार्ग धौलाधार पर्वत के लिये निकलता है। इसका नाम पास के करेरी गांव पर पड़ा है, जो दक्षिण-पूर्व दिशा में 9 किमी दूर स्थित है। करेरी झील धौलाधार पर्वत और मनकैनी पीक के शानदार दृश्य प्रस्तुत करता है। सैलानी घेरी से इस झील तक 3 किमी लंबी पैदल यात्रा से पहुंच सकते हैं।

कैसे पहुंचें
दिल्ली से सीधी वॉल्वो बस सेवा के अलावा सामान्य बस सेवाएं भी उपलब्ध हैं। दिल्ली के अलावा, चंडीगढ़, जम्मू, शिमला से भी नियमित बस सेवाएं हैं। यहां का नजदीकी एयरपोर्ट गग्गल है। जिसकी यहां से दूरी करीब 15 किलोमीटर है। नजदीकी रेलवे स्टेशन पठानकोट है। जहां से धर्मशाला करीब 85 किलोमीटर की दूरी पर है। सड़क मार्ग से यहां चंडीगढ़, कीरतपुर और बिलासपुर होते हुए पहुंचा जा सकता है। दिल्ली से धर्मशाला की दूरी लगभग 520 किलोमीटर है। दिल्ली से बस से आना हो, तो कश्मीरी गेट बस टर्मिनल से हिमाचल रोडवेज की बसें मिल जाएंगी।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *


Notice: ob_end_flush(): failed to send buffer of zlib output compression (0) in /home/himalayandiary/public_html/wp-includes/functions.php on line 4344