हिमाचल प्रदेश में है यह खूबसूरत झील, अर्जुन के तीर से निकला था पानी

आस्था और प्रकृति को करीब से जानने के लिए हिमाचल प्रदेश में कई जगहें हैं, जहां जाकर आपको इनके बारे में जानने का मौका मिलेगा। एक ऐसी ही जगह हिमाचल प्रदेश के मंडी जिले से 25 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है, जिसे तीन धर्मों का ऐतिहासिक स्थल के रूप में जाना जाता है। यह जगह रिवालसर नाम से प्रसिद्ध है। पर इसके बारे में सिर्फ आसपास के लोग ही जानते हैं या फिर जो धार्मिक आस्था रखते हों, उन्हीं लोगों को इसके बारे में मालूम है। रिवालसर एक प्रा​कृतिक झील है, जो चारों तरफ से हरे-भरे पेड़ों से घिरी हुई है। झील के किनारों पर हिंदू, बौद्ध और सिख धर्मस्थल मौजूद हैं।

इस झील के बारे में कहा जाता है कि महाभारत के समय पांडवों ने अज्ञातवास के दौरान हिमाचल की पहाड़ियों को ही अपना रहने का स्थान चुना। इस बात के कई प्रमाण आज भी हमें मिलते हैं। इन पहाड़ियों में कई गुफाएं बनी हुई हैं, जहां पांडवों ने शरण ली थी। घूमते-घूमते मां कुंती को जब प्यास लगी, तो उन्होंने अर्जुन से पानी लाने को कहा, लेकिन अर्जुन को दूर-दूर तक पानी का नामो निशान नहीं मिला। इसे देखते हुए अर्जुन ने अपनी शक्तियों का प्रयोग किया और अपने धनुष पर तीर चढ़ाया, फिर धनुष को जोर से जमीन की ओर मारा। अर्जुन के शक्तिशाली तीर से पानी की धारा फूट पड़ी और देखते ही देखते यहां एक सरोवर बन गया। कुंती ने इस सरोवर का पानी पीकर अपनी प्यास बुझाई। इसके बारे में वरिष्ठ साहित्यकार कृष्ण कुमार नूतन का कहना है कि पदम पुराण में इस घटना के बारे में बताया गया है।

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इसके अलावा घूमने-फिरने के लिए यह जगह बेहद खूबसूरत है। झील में बोटिंग तो नहीं की जाती, पर पर्यटक इसके आस-पास घूमते हैं। पर्यटक इस झील को करीब से देखकर रोमांचित नजर आते हैं। पर्यटकों के मन में इस झील से जुड़ा एक सवाल हमेशा उठता है कि इस झील का पानी कहां से आता है और कहां जा रहा है। यह झील एक ऐसी जगह पर है, जहां न तो पानी के आने का कोई रास्ता नजर आता है और न ही जाने का। बारिश के समय यह झील पूरी तरह से भर जाती है। इस झील की अपनी मान्यता है जिस वजह से रिवालसर आने वाले और नैणा देवी जाने वाले श्रद्धालु इस झील के दर्शन करने जरूर आते हैं।

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