कमरूनाग झील में अर्पित किए जाते हैं सोने-चांदी के गहने - THE HIMALAYAN DIARY

कमरूनाग झील में अर्पित किए जाते हैं सोने-चांदी के गहने

हिमाचल प्रेदश अपनी खूबसूरती के लिए जाना जाता है, जिस वजह से यहां घूमने के लिए हर साल काफी संख्या में सैलानी आते हैं। हिमाचल प्रदेश को धार्मिक मान्यताओं के लिए भी जाना जाता है। हिमाचल के मंडी जिले में कमरूनाग मंदिर है। इस मंदिर के पास ही कमरूनाग झील है। यह झील 3,334 मीटर की ऊंचाई पर है। झील से जुड़ी पुरानी मान्यता है कि भक्त झील में सोने-चांदी के गहने व पैसे डालते हैं। सदियों से चली आ रही इस परम्परा के आधार पर यह माना जाता है कि इस झील की गर्त में अरबों का खजाना दबा पड़ा है। इस मंदिर का 1963 में मंदिर का जीर्णोद्धार हुआ था।

देव कमरूनाग को बारिश का देवता माना जाता है। इस मान्यता के अनुसार भगवान कमरूनाग को सोने-चांदी व पैसे चढ़ाने की प्राचीन मान्यता है। यहां जून में लगने वाले मेले के दौरान श्रद्धालुओं द्वारा झील में सोने-चांदी के गहनों को अर्पित करते हुए देखा जा सकता है। कमरूनाग में लोहड़ी पर भव्य पूजा का आयोजन किया जाता है। स्थानीय लोगों का मानना है कि यहां से कोई भी इन पैसों को नहीं ले पाता है। पुरानी मान्यताओं के अनुसार एक बार एक ब्रिटिश व्यक्ति ने इस झील से सोना निकालने की कोशिश की थी, लेकिन वह इसमें नाकामयाब रहा और बीमारी का शिकार हो गया।

रुद्रप्रयाग में है कोटेश्वर महादेव मंदिर, भगवान शिव ने यहां ली थी शरण

कमरूनाग झील के चारों तरफ देवदार के घने जंगल हैं। इस झील के किनारे देवता का एक प्राचीन मंदिर है, जो पहाड़ी शैली का अद्भूत नमूना है। यह मंदिर मंडी जिले के कमराह गांव के घने जंगल में है। कमरूनाग झील मंडी जिले से 9 हजार फीट ऊपर है। सर्दी के दिनों में यह झील पूरी तरह से जम जाती है। इस समय केवल अनुभवी ट्रेकर ही इस क्षेत्र में पहुंचते हैं। इस मंदिर का आकार काफी छोटा है, लेकिन फिर यहां हर साल आने वाले भक्तों की तादाद बढ़ती जा रही है।

सोलन में है ऐतिहासिक शूलिनी देवी का मंदिर, दर्शन मात्र से मिलती है सुख-समृद्धि

मंदिर व झील के रखरखाव का काम मंदिर कमेटी की ओर से करवाया जाता है। कमेटी की ओर से मंदिर के पास श्रद्धालुओं के ठहरने की व्यवस्था भी की जाती है। रोहांडा से कमरूनाग तक 6 किलोमीटर की तेज पहाड़ी रास्ते पर पैदल यात्रा को पूरा करने में 3 से 4 घंटे लगते हैं।

कैसे पहुंचें

दिल्ली से कमरूनाग झील की दूरी तकरीबन 445 किलोमीटर है, जिसमें 10 से 11 घंटे का समय लगता है। इसके लिए आपको सबसे पहले मंडी आना होगा, जिसकी दूरी 410 किलोमीटर है। इसके बाद यहां से किसी भी लोकल साधन द्धारा बग्गी गांव पहुंचें। यहां से कमरूनाग झील तक जाने के ​लिए 8 किलोमीटर का पैदल रास्ता तय करना होता है।

हिमाचल प्रदेश की खूबसूरत नगरी पौंटा साहिब में है प्रसिद्द देई का मंदिर

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *