15000 बोतलों से मसूरी में बनी “उम्मीद की दीवार”

Mussoorie wall of hope – उत्तराखंड की खूबसूरत वादियों के सिर्फ भारतीय ही नहीं कई विदेशी भी दीवाने हैं। देवभूमि के नाम से मशहूर उत्तराखंड की खूबसूरत जगहों में एक नाम मसूरी का भी शामिल है। मसूरी की खूबसूरती देखते ही बनती है जिस वजह से पर्यटक यहां हर साल घूमने आते हैं, फिर चाहे मौसम कैसा भी हो। मसूरी और इसके आस-पास घूमने की कई जगहें हैं, जो पर्यटकों को अपनी ओर लुभाती है। मसूरी की खूबसूरती बनाए रखने और पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए यहां एक उम्मीद की दीवार बनाई गई है। लोगों को प्लास्टिक के प्रति जागरूक किया जा सके, इस वजह से यहां कचरे में पड़े प्लास्टिक से एक दीवार बनाई गई है।

Mussoorie wall of hope

नेस्ले इंडिया और रीसिटी नेटवर्क हिलारी द्धारा यह आंदोलन चलाया जा रहा है। आज प्लास्टिक का यूज बढ़ता जा रहा है। हर चीज में प्लास्टिक देखने को मिलता है। इसके चलते इस दीवार को तैयार किया गया है।

15000 बोतलों से बनी  दीवार (Mussoorie wall of hope)

मसूरी में इस अभियान को चलाने वाली टीम ने मसूरी में गंदगी न फैलने के लिए कैम्पटी फॉल के पास बंगलों की कांडी गांव में 15000 प्लास्टिक बोतलों से एक वॉल ऑफ होप (wall of hope) बनाई है।

ऐसा करने के पीछे उनका मकसद है कि वो लोगों को कूड़ा न फैलाकर बल्कि कुछ अलग करने के लिए प्रेरित करें। यह दीवार 1500 फीट लंबी और 12 फीट ऊंची है।

Mussoorie wall of hope

दीवार को म्यूजियम ऑफ गोवा के फाउंडर सुबोध केरकर ने बनाया है। मसूरी के स्कूल और कॉलेज के 50 बच्चों और कैम्पटी फॉल के नजदीक स्थित बंगलो की कांडी गांव की महिलाओं ने इस दीवार को बनाने में सहायता की। इस दीवार के माध्यम से यहां न केवल पर्यटकों की संख्या बढ़ेगी, बल्कि उन तक प्लास्टिक के रियूज का एक संदेश भी जाएगा। दीवार हिलडारी परियोजना का एक हिस्सा है। हिलडारी वह आंदोलन है, जो मसूरी को भारत के सबसे स्वच्छ हिल स्टेशनों में से एक बनाने का काम करता है।

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