प्राकृतिक खूबसूरती और प्राचीनतम धार्मिक स्थलों का संगम है नारानाग

जम्मू-कश्मीर की प्राकृतिक खूबसूरती के कायल लोग इसे धरती का स्वर्ग कहते हैं। कश्मीर की खूबसूरत वादियां, ऊंचे-ऊंचे बर्फ से ढके पहाड़ और झरने हर किसी को अपनी ओर आकर्षित करते हैं। हर साल बड़ी संख्या में पर्यटक कश्मीर के पर्यटन स्थलों की खूबसूरती का दीदार करने पहुंचते हैं। कश्मीर का ऐसा ही एक बेहद खूबसूरत पर्यटन स्थल है नारानाग, जो गांदरबल जिले में है। 2128 मीटर की ऊंचाई पर बसा यह पर्वतीय पर्यटक स्थल वंगथ झरने के बाएं किनारे पर बसा हुआ है, जो आगे चलकर सिंद नाले में मिलता है। नारानाग को प्राकृतिक घास के मैदान, झीलों और पहाड़ों के लिए जाना जाता है। यहां की प्राकृतिक खूबसूरती देखने लायक होती है। नारानाग से 16,840 फुट ऊंचे हरमुख पर्वत और गंगाबल झील के लिये ट्रैक शुरू होता है।

शांत वातावरण के बीच पब्बर घाटी में करे प्रकृति के अद्भुत सौंदर्य का दीदार’

नारानाग का अर्थ

नारानाग नाम का मतलब होता है नारायणा नाग। कश्मीरी भाषा में नाग का मतलब होता है ‘पानी का चश्मा’। कश्मीर में पानी का चश्मा उस जगह को कहते हैं, जहां जमीन के नीचे मौजूद जलाशय से पानी निकलता है। पानी के चश्मे अक्सर ऐसी जगहों पर बनते हैं जहां जमीन में कई दरारें हो और उनमें बारिश, नदियों या झीलों का पानी चला जाता है। यह पानी जमीन के नीचे ही प्राकृतिक नालियों में सफर करता हुआ किसी दूसरी जगह से निकलता है। कश्मीर में जहां-जहां यह चश्मा बनता है, उस जगह के नाम से नाग जुड़ा हुआ है।

Image result for naranag

प्राचीन मंदिरों के लिए प्रसिद्द

प्राकृतिक खूबसूरती के अलावा नारानाग अपने मंदिरों के लिए भी पर्यटकों के बीच काफी प्रसिद्द है। नारानाग में स्थित मंदिर भारत के सबसे महत्वपूर्ण पुरातन-स्थलों में गिने जाते हैं। यहां भगवान शिव को समर्पित मंदिरों का समूह है, जो एक-दूसरे की तरफ मुख किये हुए हैं। माना जाता है कि इन मंदिरों का निर्माण 8वीं शताब्दी में कश्मीर नरेश ललितादित्य ने करवाया था। नारानाग में आज भी कश्मीर में पाये जाने वाले प्राचीनतम आर्य परंपरा के मंदिर समूह के अवशेष उपस्थित हैं। पुरातत्व विभाग का कहना है कि प्राचीन समय में नारानाग का नाम सोदरतीर्थ हुआ करता था, जो प्रमुख तीर्थस्थलों में से एक नाम था। ट्रेकिंग को पसंद करने वाले पर्यटकों को भी यह जगह काफी पसंद आती है। नारानाग हरमुख पर्वत और गंगाबल झील की ट्रेकिंग का बेस कैंप है।

अनछुई प्राकृतिक खूबसूरती का धनी है रानीखेत के नजदीक स्थित चौखुटिया

कैसे पहुंचें नारानाग

नारानाग से नजदीकी बड़ा शहर गांदरबल यहां से लगभग 30 किलोमीटर की दुरी पर है। गान्दरबल से नारानाग तक के सफर का एक हिस्सा वाहन की मदद से और दूसरा हिस्सा पैदल या घोड़े की मदद से तय करना पड़ता है। गांदरबल श्रीनगर से लगभग 20 किलोमीटर और जम्मू से लगभग 290 किलोमीटर दूर है। जम्मू और कश्मीर के प्रमुख शहरों से गांदरबल के लिए नियमित बस सेवाएं उपलब्ध हैं। गांदरबल से नजदीकी हवाई अड्डा श्रीनगर में, जबकि निकटतम रेलवे स्टेशन जम्मू में स्थित है।

प्रकृति और जीवों से है प्यार तो एक बार जरूर करें दाचीगम सेंक्चुरी का दीदार

14 हजार फीट की ऊंचाई पर स्थित है एशिया का सबसे ऊंचा पुल

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *