पर्यटकों के लिए एक बार फिर से खोला गया रोहतांग दर्रा, जनजातीय लोगों ने ली राहत की सांस

शुक्रवार दोपहर को लाहौल-स्पीति घाटी को देश के शेष हिस्से से जोड़ने वाले रोहतांग दर्रे को सीमा सड़क संगठन द्वारा लोगों की आवाजाही के लिए खोल दिया गया है। इसके अलावा लाहुल का दारचा मार्ग भी सीमा सड़क संगठन के जवानों ने बहाल कर दिया है। सीमा सड़क संगठन के जवानों ने मिशन स्नो क्लीयरेंस शुरू करने के महज 24 घंटों के भीतर ही रोहतांग दर्रे को बहाल कर दिया। रोहतांग दर्रे के खुलने के बाद शुक्रवार को कोकसर से मनाली की तरफ लगभग 50 वाहनों को छोड़ा गया, जबकि वन वे ट्रैफिक के चलते मनाली से लाहौल की तरफ एक भी वाहन को नहीं जाने दिया गया। शनिवार को मनाली से लाहौल की तरफ वाहनों को छोड़ा जाएगा।

गौरतलब है कि भारी बर्फबारी के कारण 12 नवंबर को रोहतांग दर्रे को इस साल चौथी बार बंद कर दिया गया था। रोहतांग दर्रे के बंद होने के बाद जनजातीय लोगों ने इसे वापस खोलने की मांग की थी, जिसे सीमा सड़क संगठन द्वारा ठुकरा दिया गया था। ऐसे में जनजातीय लोगों ने खुद चंदा जुटाकर रोहतांग दर्रे को खोलने के ऐलान कर दिया। जनजातीय लोगों के इस कदम से शिमला से दिल्ली तक हलचल मच गई। इसके बाद सीमा सड़क संगठन के जवानों ने 21 नवंबर को बर्फ हटाने का काम शुरू किया। इस दौरान जवानों को बर्फीली हवाओं के साथ-साथ -15 डिग्री तापमान का भी सामना करना पड़ा।

 रोहतांग दर्रे के वापस बहाल होने से लाहौल के आदिवासियों ने राहत की सांस ली है क्योंकि इस रास्ते के बंद हो जाने से उनका जीवन प्रभावित होता है। गौरतलब है कि मनाली को लेह से सड़क मार्ग द्वारा जोड़ने वाला यह दर्रा समुद्र स्‍तर से 4111 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। इसे हिमाचल प्रदेश के लाहोल-स्पीति ज़िले का प्रवेश द्वारा भी कहा जाता है। रोहतांग दर्रा प्रदेश के प्रमुख पर्यटन स्थल मनाली से लगभग 52 किलोमीटर दूर है। रोहतांग दर्रा से मनाली, पहाडों और ग्‍लेशियर का अद्भुत नजारा देखने को मिलता है। यहां पूरे साल भर बर्फ की सफ़ेद चादर बिछी हुई रहती है, जिससे यहां का नजारा बहुत ही खूबसूरत नजर आता है।

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