हिमाचल में बारिश और बर्फबारी से लुढ़का पारा, अक्टूबर से दिखेगा ठंड का असर

जिला कुल्लू में भी काफी बारिश हुई है। हमीरपुर में भी बादल बरसे हैं। मनाली में बारिश होने से सेब का तुड़ान प्रभावित हुआ है। मनाली के मशहूर पर्यटन स्थल रोहतांग दर्रे में भी बर्फ के फाहे गिरे हैं।

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Tirathan Valley of Kullu is heaven for peace lovers

The Tirthan valley is located nearby Tirathan river at an altitude of 1600 metres above sea level in Kullu district. Every year a large number of tourists visit this place. Himalayan National Park is just 3 kms away from here. The infinite peace prevails all over through the lush green forests and apple orchards located beside the river banks.

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15 जुलाई से शुरू होगी श्रीखंड महादेव की यात्रा, मानी जाती है बेहद कठिन यात्रा

हर साल लगभग जुलाई के समय में शुरू होती है जो लगभग 15 दिनों तक चलती है। इस साल यह यात्रा 15 से 25 जुलाई तक होगी। यात्रियों को 10 से 14 जुलाई तक निरमंड तहसील कार्यालय में पंजीकरण करवाना होगा।

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मनाली में है संसार के पहले मनुष्य ऋषि मनु का मंदिर

प्रलय काल के दौरान जब संपूर्ण पृथ्वी जल में समा रही थी, उस समय ऋषि मनु ने एक बड़ी नौका तैयार की। अपने भक्त को बचाने के लिए उस समय भगवान विष्णु ने मत्स्य अवतार लिया और ऋषि मनु की नाव को हिमालय की चोटियों पर पहुंचा दिया।

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कांगड़ा जिले में आज से शुरू होगा बहुप्रतीक्षित त्रिगर्त उत्सव, किशन कपूर करेंगे समारोह का शुभारंभ

त्रिगर्त उत्सव में लोगों को कांगड़ा घाटी की कला, संस्कृति एवं इतिहास के विविध पहलुओं से रूबरू करवाया जाएगा। महीने भर तक चलने वाले इस समारोह का आयोजन भाषा एवं संस्कृति विभाग हिमाचल प्रदेश और कांगड़ा जिला प्रशासन के द्वारा संयुक्त रूप से किया जा रहा है। त्रिगर्त उत्सव के तहत जिलेभर में विभिन्न कार्यक्रमों की श्रृंखला आयोजित की जाएगी।

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मानव परिंदों से फिर गुलजार हुई बीलिंग घाटी, पहले दिन पैराग्लाइडिंग करने पहुंचे 100 से अधिक पायलट

प्रतियोगिता के पहले दिन पुरुषों की श्रेणी में न्यूजीलैंड के मैट्ट सीनियर पहले, न्यूजीलैंड के ही लुइस टोपर दूसरे और भारत के देवू चौधरी तीसरे स्थान पर रहे। महिला श्रेणी में एलीना पहले, अन्ना दूसरे व विरोनिका तीसरे स्थान पर रहीं। यह तीनों ही महिलाएं रशिया की नागरिक हैं। अगर भारतीयों की बात की जाएं तो देवू चौधरी पहले, विजय सेनी दूसरे, यशपाल तीसरे व प्रकाश चंद ठाकुर चौथे स्थान पर रहे।

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कालका से शिमला के बीच चलने वाली टॉय ट्रेन की गति बढ़ाएगा रेलवे, महज 3 घंटे में पूरा होगा सफ़र

पिछले दिनों रेल मंत्री पीयूष गोयल कालका-शिमला रेलमार्ग का निरीक्षण करने के लिए पहुंचे थे। इस दौरान रेल मंत्री ने इस दूरी को तय करने में लगने वाले पांच घंटे के समय को तीन घंटे करने की संभावनाओं को तलाश करने के लिए कहा था। रेलवे के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि रेल मंत्री ने इस संबंध में रिपोर्ट तैयार कर इस साल के अंत तक सौंपने के लिए कहा है। फिलहाल ट्रायल किए जा रहे हैं। कालका से शिमला रेल मार्ग में करीब 102 सुरंगे और सैकड़ों घुमावदार मोड़ हैं, जिसकी वजह से ट्रेन की रफ़्तार को कम करना पड़ता है। ऐसे में अब कोशिश की जाएगी कि 48 डिग्री के तीव्र घुमाव वाले ट्रैक पर भी ट्रेन की रफ्तार को कम ना करना पड़े।

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अब रोहतांग का सफर होगा और भी ज्यादा रोमांचक, मनाली-रोहतांग के बीच शुरू हुई हेली टैक्सी सेवा

मनाली-रोहतांग के बीच उड़ने वाली हेलीकॉप्टर जॉय राइड सेवा को पर्यटन विभाग द्वारा आर्यन एविएशन के सहयोग से शुरू किया गया है। इस सेवा को हरी झंडी दिखाने के बाद मुख्यमंत्री ने कहा कि इससे पर्यटन कारोबार को पंख लगेंगे। हालांकि इस सेवा का लाभ लेने के लिए पर्यटकों को 3500 रुपये खर्च करने होगे। अगर यह योजना सफल होती है तो आने वाले समय में हेलीकॉप्टरों की संख्या बढ़ाई जाएगी। आर्यन्न एविएशन के निदेशक ने कहा कि उनकी कंपनी और हिमाचल सरकार की ओर से शुरू की इस सेवा से यहां के पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा। भविष्य में मांग को देखते हुए हेलीकॉप्टरों की संख्या बढ़ाई जाएगी। एक समय में एक हेलीकाप्टर में पांच लोग आराम से बैठ सकते हैं।

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ज्वालामुखी मंदिर में पृथ्वी के गर्भ से निकल रही नौ ज्वालाओं की होती है पूजा

यह चमत्कारिक मंदिर अपने अंदर कई सारे रहस्यों को समेटे हुए है। इस स्थल को जोता वाली का मंदिर और नगरकोट भी कहा जाता है। मंदिर में माता के अन्य मंदिरों की तरह मूर्ति की पूजा नहीं की जाती है बल्कि पृथ्वी के गर्भ से निकल रही नौ ज्वालाओं की पूजा की जाती हैं।

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हिमाचलियों की शान, प्रदेश की प्रसिद्ध पारंपरिक धाम

प्रदेश के ग्रामीण इलाकों में आज भी पारंपरिक ढंग से धाम बनाई जाती हैं। इसे बनाने का तरीका प्रदेश में अलग-अलग जगहों पर अलग-अलग हैं। धाम में 500 से 1000 लोगों तक का खाना बनाया जाता है। इसे पारंपरिक तरीके से पत्तो की थाली में परोसा जाता हैं।

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लंका दहन के साथ खत्म हुआ कुल्लू दशहरा उत्सव, अपने-अपने स्थानों पर लौटे देवी-देवता

कुल्लू दशहरा के समाप्त होने के बाद महोत्सव में शामिल होने के लिए पहुंचें सैकड़ों देवी-देवता अपने-अपने देवालयों पर लौट गए। इस महोत्सव में शामिल होने के लिए करीब 225 देवी-देवता पहुंचें थे। अंतिम दिन करीब 15 मिनट तक लंका दहन की परंपरा निभाई गई। इसके बाद भगवान रघुनाथ देवी-देवताओं के साथ फिर मंदिर से पहुंचें। इस दौरान श्रद्धालु लगातार जय श्री राम के नारे लगाते रहे। इसके बाद ढोल और शहनाई बजाकर सभी देवी-देवताओं को विदाई दी गई। हजारों श्रद्धालुओं ने भगवान रघुनाथ का रथ खींचकर उन्हें वापस रघुनाथ मंदिर में विराजमान किया। इसी के साथ कुल्लू दशहरा महोत्सव का अंत हो गया।

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