Himachal tourism Archives - THE HIMALAYAN DIARY

धर्मशाला से मैक्लोडगंज का सफर अब होगा रोपवे से, एक साल में पूरा होगा निमार्ण कार्य

धर्मशाला से मैक्लोडगंज तक रोपवे का निर्माण किया जाएगा, जिसकी कुल दूरी 1.75 किलोमीटर है। इसके बनने से धर्मशाला से मैक्लोडगंज तक की दूरी पर्यटक हवाई द्धारा तय कर सकेंगे।

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14 हजार फीट की ऊंचाई पर स्थित है एशिया का सबसे ऊंचा पुल

चिचम ब्रिज, एशिया का सबसे ऊंचाई पर बना रोड ब्रिज है। पहले यह गौरव चीन को मिला था। वहां सिंधू नंदी पर इससे पहले एशिया का सबसे ऊंचा पुल बना था।  क्योटो चिचम काजा बाई पास के बन जाने से मनाली आने वाले लोग अब रंगरिक पांग का रुख नही करना पड़ता है।

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15 देशों के इस दल ने चैरिटी के लिए की ऑटो में लेह से शिमला तक की यात्रा

रोमांच में मजा दोगुना तब होता, जब इसे किसी खास मकसद से किया जा रहा हो। इस रोमांचकारी सफर पर 15 देशों के 45 लोग निकल पड़े। खास बात यह है कि उन्होंने यह सफर ऑटो में तय किया है।

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हिमाचल प्रदेश में है यह खूबसूरत झील, अर्जुन के तीर से निकला था पानी

रिवालसर एक प्रा​कृतिक झील है, जो चारों तरफ से हरे-भरे पेड़ों से घिरी हुई है। झील के किनारों पर हिंदू, बौद्ध और सिख धर्मस्थल मौजूद हैं।

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कमरूनाग झील में अर्पित किए जाते हैं सोने-चांदी के गहने

कमरुनाग झील 3,334 मीटर की ऊंचाई पर है। इस झील से जुड़ी पुरानी मान्यता है कि भक्त झील में सोने-चांदी के गहने तथा पैसे डालते हैं। माना जाता है कि इस झील की गर्त में अरबों का खजाना दबा पड़ा है।

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लाहौल – स्पीति को जोड़ता है Kunzum Pass, गर्मियों में तापमान 20 डिग्री से भी कम

यहां एक मंदिर भी स्थित है जिसे कुंजम माता के नाम से जाना जाता है। इस मंदिर की खास बात यह है कि यहां से आगे जाने के लिए यहां पर सिर झुकाना पड़ता है तभी आगे का सफर शुरू किया जाता है।

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मैक्लॉडगंज में देखने को मिलता है प्राकृतिक सौंदर्य और भारत-तिब्बत संस्कृति का अद्भुत संगम

मेकलॉडगंज प्राकृतिक सौंदर्य के लिए भी जाना जाता है। शांति और खूबसूरत वातावरण, ऊंचे-ऊंचे पहाड़, मनमोहक झरने, देवदार के हरे-भरे पेड़ हर किसी के मन को अपनी ओर खींचते हैं। एक बार जो पर्यटक यहां आ जाता है वह मेकलॉडगंज की वादियों के मनमोहक नजारों को कभी नहीं भूल पाता हैं।

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बर्फ से ढके पहाड़ और गहरी घाटियां, हिमाचल का बेहद खूबसूरत हिल स्टेशन है नारकंडा

भारत-तिब्बत मार्ग पर 2708 मीटर की ऊंचाई पर स्थित नारकंडा चारों ओर फैली सफेद बर्फ से ढकी और गहरी घाटियों के लिए प्रसिद्द है। नारकंडा में प्रकृति की अद्भुत छटा देखने लायक होती है। बर्फबारी के बाद यहां सैलानियों और स्कीइंग प्रेमियों की तादात बढ़ने लगती है। विभिन्न राज्यों से पर्यटक हर वर्ष नारकंडा में स्कीइंग के लिए पहुंचते हैं।

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प्रकृति की खूबसूरत वादियों के बीच पर्यटक सराहन में ले सकते हैं बर्फबारी का असली मजा

आकर्षक पहाड़ियों और घाटियों से घिरा होने के बावजूद यह जगह आज भी पर्यटकों की नज़रों से दूर ही हैं। प्राकृतिक सौंदर्य के अलावा सराहन में भीमाकली मंदिर परिसर, बर्ड पार्क और भाभा घाटी जैसे दर्शनीय स्थल भी मौजूद हैं। भीमाकली का यह मंदिर करीब 800 साल पुराना है। यहां हर साल बड़ी संख्या में भक्त पहुंचते हैं।

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प्राकृतिक सौंदर्य और चाय के बागानों के लिए पूरी दुनिया में प्रसिद्द हैं पालमपुर

पालमपुर को ‘टी’ सिटी के नाम से भी जाना जाता है। हरे-भरे चाय के बागान यहां आने वाले पर्यटकों के लिए सबसे बड़ा आकर्षण का केंद्र हैं। यहां चाय बागानों में घूमते हुए मार्ग के दोनों और चाय के झाड़ीनुमा पौधे और चाय की पत्तियां चुनते लोग बेहद आकर्षण लगते हैं।

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