शिमला के ढाई सौ साल पुराने तारा देवी मंदिर की लौटी रौनक, भक्तों का दरबार में लगा तांता

शिमला के पहाड़ी इलाकों में स्थित 250 साल पुराने तारा देवी मंदिर के पुनर्निर्माण का काम पूरा हो चुका है। राजधानी से लगभग 11 किलोमीटर दूर इस प्राचीन मंदिर को उसी तरह ढाला और संवारा गया है जैसे वह सदियों पहले हुआ करता था।

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बेहद कठिन है श्रीखंड महादेव यात्रा, अब अगली जुलाई तक करने होगा दर्शन के लिए इंतजार

हिमालय की गोद में विराजमान श्रीखंड महादेव की यात्रा आधिकारिक तौर पर मंगलवार को संपन्न हो गई। अमरनाथ और कैलाश मानसरोवर से भी ज्यादा कठिन यह पवित्र यात्रा बीते 15 जुलाई को शुरू हुई थी। भक्तों का रजिस्ट्रेशन 28 जुलाई को ही बंद कर दिया गया था। मंगलवार को यात्रा खत्म होने की आधिकारिक घोषणा कर दी गई।

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कुल्लू घाटी में सबसे पवित्र है हनोगी माता मंदिर, आसपास एडवेंचर का भी है पूरा इंतजाम

यदि आप पूरी तरह धार्मिक और आध्यात्मिक यात्रा के लिए निकलते हैं तो यहां हनोगी मंदिर के अलावा हदीम्बा मंदिर, जगतसुख, मनु मंदिर, जगन्नाथ देवी मंदिर, बसेश्वर महादेव मंदिर, रघुनाथ मंदिर, बिलील महादेव मंदिर और जमूला मंदिर ऐसे स्थान हैं जहां आप दर्षन कर अपनी मनोकामनाएं मांग सकते हैं। हां, मूड कुछ एडवेंचर का है तो यहां इसकी पर्याप्त व्यवस्था है।

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चंबा की आन और हिमाचल की शान, 7 दिन का अंतरराष्ट्रीय मिंजर मेला आज से हुआ शुरू

हिमाचल प्रदेश का सबसे बड़ा अंतरराष्ट्रीय मिंजर मेला आज से शुरू हो रहा है। चंबा के चौगान में सात दिन चलने वाले इस महोत्सव में राज्य ही नहीं, देश-विदेश से तमाम जानी-मानी हस्तियां व पर्यटक शामिल होते हैं। यह एक तरह का विजयोत्सव है। वर्ष 935 ईसवी में जब चंबा के राजा कांगड़ा पर विजय प्राप्त कर वापस आए थे तो स्थानीय लोगों ने उन्हें गेहूं, मक्का और धान के मिंजर और ऋतुफल भेंट कर खुशियां मनाई थीं।

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पहाड़ों में आरामदायक सफर, हिमाचल में लोकप्रिय टूरिस्ट स्पाॅट तक चलेंगी कूल इलेक्ट्रिक बसें

पहाड़ी टूरिस्ट स्पाॅट तक आरामदायक सफर कराने के मकसद से आधुनिक सुविधाओं वाली कूल-कूल इलेक्ट्रिक बसें चलाई जाएंगी। कसौली, कुल्लू-मनाली, धर्मशाला-मैक्लोडगंज, डलहौजी-चंबा और शिमला-सोलन जैसे शहरों में बारहों महीने पर्यटकों का तांता लगा रहता है लेकिन, यहां तक पहुंचने में पर्यटकों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। प्रदूषण फैलाने वाली डीजल-पेट्राल ट्रांसपोर्ट सेवाओं से पर्यावरण को भी नुकसान पहंचता है।

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अगले साल लेह, जोजिला व लाहौल-स्पीति जैसे बर्फीले पर्यटन स्थलों तक पहुंचना होगा आसान

देश-विदेश में मशहूर मनाली-लेह और लाहौल-स्पीति समेत तमाम खूबसूरत पर्यटन स्थलों तक पहुंचना अब आसान होने वाला है। पहाड़ी बर्फीले क्षेत्रों में सीमा तक सेना की आसान आवाजाही और दुर्गम पहाड़ी टूरिस्ट स्पाॅट पर सालभर पर्यटकों की चहल-पहल बनाए रखने के मकसद से रोहतांग टनल का निर्माण किया जा रहा है। यह टनल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्राथमिकताओं में से एक है।परियोजना से जुड़े अधिकारी जल्द से जल्द इसे पूरा करने के प्रयास कर रहे हैं।

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कला के साथ खिल उठेंगे पर्यटन के रंग, टूरिज्म हब मैक्लोडगंज में खुली कांगड़ा आर्ट गैलरी

टूरिज्म हब मैक्लोडगंज में स्थानीय कला और संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए नई कला गैलरी खोली गई है। कंगड़ा कला संवर्धन सोसायटी (केएपीएस) द्वारा शुरू की गई इस गैलरी का सबसे बड़ा फायदा ऐसे स्थानीय कलाकारों को मिलेगा जिन्हें कहीं से भी सहायता नहीं मिलती। उचित मंच नहीं मिलने के कारण उनकी कला को असली कद्रदान नहीं मिल पाते। दूसरे, पर्यटन केंद्र होने के चलते मैक्लोडगंज आने वाले पर्यटक भी इसका भरपूर लाभ उठाएंगे।

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उत्तराखंड-हिमाचल में फिर होगी भारी वर्षा, अगले तीन दिन खतरनाक डेस्टिनेशन पर जाने से बचें पर्यटक

एडवेंचर और परेशानी में भी कुछ अलग करने की चाह में पहाड़ों का रुख करने वाले लोगों के लिए जैसे मन मांगी मुराद पूरी हो रही है। मौसम विभाग ने अगले तीन दिन तक उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश में भारी से भारी वर्षा होने का पूर्वानुमान जारी किया है। कई जिलों के डीएम को निर्देश दिया गया है कि वे नदी के किनारे से लोगों को सुरक्षित स्थानों पर भेज दें और पर्यटकों को भी खतरनाक जगहों पर जाने से मना करें।

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भक्तों के पैरों में नहीं पड़ेंगे छाले, माता भरमाणी मंदिर से मणिमहेश के लिए 20 अगस्त से मिलेगी यह सुविधा

हिमाचल प्रदेश के भारमौर में बर्फ से ढकी पहाड़ों की चोटी पर स्थित ऐतिहासिक भरमाणी माता के मंदिर तक पहुंचने में अब श्रद्धालुओं को कोई मुश्किल नहीं होगी। आगामी 20 अगस्त से यहां हेली टैक्सी की सुविधा मिलने लगेगी। हेली टैक्सी भारमौर में माता भारमणी मंदिर से मणिमहेश झील के नीचे कुछ किलोमीटर पर स्थित गौरीकुंड तक चलेगी।

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मस्ती में मौसम का खलल, कुल्लू में 15 सितंबर तक अपने प्रिय वाटर गेम्स से महरूम रहेंगे पर्यटक

यूं तो बारिश का सीजन किसी को भी घर से बाहर निकल मस्ती करने के लिए मजबूर कर देता है। इस सीजन में बड़ी संख्या में पर्यटक पहाड़ों का रुख करते हैं। यहां रुई के गालों की तरह पहाड़ों की चोटियों पर घूमते बादल, झमाझम बारिश तो खूब भाती ही है, कुल्लू आने वाले पर्यटक पैराग्लाइडिंग के साथ ब्यास में राफ्टिंग का आनंद लेना नहीं भूलते लेकिन अगले दो माह तक उन्हें इससे महरूम रहना होगा। मौसम ने मस्ती में खलल डाल दिया है।

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