देहरादून में है प्रसिद्द टपकेश्वर महादेव मंदिर, यहां स्थित है स्वयंभू शिवलिंग

टपकेश्वर मंदिर देवताओं का निवास स्थान है। यहीं पर देवता भगवान शिव का ध्यान किया करते थे। यहां स्थित पवित्र गुफा में भगवान शिव ने देवताओं को देवेश्वर के रूप में दर्शन दिए थे। इसके बाद भगवान शिव ने ऋषियों को दर्शन दिए।

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हरिद्वार में है दक्ष महादेव मंदिर, यहां मां सती ने किया था अपने जीवन का त्याग

दक्ष महादेव मंदिर में भगवान शिव जी की मूर्ति लैंगिक रूप में विराजित है। मंदिर में भगवान विष्णु के पांव के निशान भी मौजूद है। मंदिर परिसर में एक छोटा सा गड्डा भी है, जिसके बारे में कहा जाता है कि यहीं पर माता सती ने अपने जीवन का बलिदान दिया था।

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अद्भुत वास्तुकाला और नक्काशी के लिए प्रसिद्द है चंपावत का बालेश्वर मंदिर

इस मंदिर समूह में करीब आधा दर्जन से ज्यादा शिवलिंग स्थापित हैं। मंदिर का निर्माण 12वीं शताब्दी के शासकों द्वारा करवाया गया था। यह मंदिर अपनी वास्तुकला के लिए भी प्रसिद्द है। मंदिर की वास्तुकाला और नक्काशी इसके प्राचीन होने के साक्ष्य हैं।

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मुस्लिम गडरिए ने की थी अमरनाथ गुफा की खोज, जानिए पूरी कहानी

हिन्दू धर्म के बीच आस्था के केंद्र अमरनाथ गुफा की खोज करीब 500 साल पहले एक कश्मीरी मुसलमान बूटा मलिक ने की थी। बूटा मलिक पेशे से गड़रिए थे और पहाड़ पर ही भेड़-बकरियां चराते थे। एक दिन जंगल में उनकी मुलाकात एक साधु से हुई और दोनों की दोस्ती हो गई।

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दुनिया का सबसे बड़ा शिव मंदिर है पंच केदारों में से एक तुंगनाथ मंदिर

तुंगनाथ मंदिर का नाम भगवान राम से भी जुड़ा हुआ है। मान्यता है कि रावण का वध करने के बाद भगवान राम ने ब्रह्माहत्या के श्राप से मुक्ति पाने के लिए यहां आकर भगवान शिव की तपस्या की थी। तभी से इस स्थान को ‘चंद्रशिला’ नाम से भी जाने जाना लगा।

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सोलन में स्थित है भगवान शिव को समर्पित एशिया का सबसे ऊंचा मंदिर

स्वामी कृष्णानंद परमहंस ने इस पवित्र धार्मिक स्थल पर भगवान शिव की घोर तपस्या की और त्रिशूल के प्रहार से जमीन में से पानी निकाला। इसके बाद से कभी भी जटोली में पानी समस्या नहीं हुई। लोग इस पानी को बहुत ही पवित्र मानते हैं।

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जम्मू में स्थति है चमत्कारिक शिवखोड़ी गुफ़ा, भगवान शिव ने किया था निर्माण

मान्यता है कि भगवान शंकर और भस्मासुर में भीषण युद्ध हुआ, लेकिन भस्मासुर ने हार नहीं मानी। अपने दिए हुए वरदान के कारण भगवान शिव उसे मार भी नहीं सकते थे। ऐसे में भगवान शिव ने अपने त्रिशूल से शिवखोड़ी का निमार्ण किया और गुफ़ा में छिप गए।

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रुद्रप्रयाग में है मध्यमहेश्वर का मंदिर, होती है भगवान शिव की नाभि की पूजा

भगवान शिव के भक्तों के बीच मध्यमहेश्वर मंदिर का खास महत्व है। यहां भगवान शिव के बैल रुप के मध्य भाग की पूजा की जाती है। इस मंदिर की वास्तुकला उत्तर भारतीय शैली से निर्मित है। मंदिर के गर्भ गृह में काले पत्थर से निर्मित नाभि के आकार का शिवलिंग स्थापित है।

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सर्दियों में रुद्रप्रयाग के उखीमठ में होती है भगवान केदारनाथ की पूजा

सर्दियों के मौसम में केदारनाथ मंदिर और मध्यमहेश्वर से मूर्तियों को उखीमठ लाया जाता हैं। इसके अलावा यह स्थान पंच केदार का भी मुख्य पड़ाव भी है। यहीं पर राजा मान्धाता की तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें ओंकार रूप में दर्शन दिए थे।

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ऋषिकेश में है नीलकंठ महादेव का मंदिर, यहीं किया था भगवान शिव ने विषपान

मंदिर के मुख्य द्वार पर द्वारपालो की प्रतिमा बनी हैं। मंदिर परिसर में कपिल मुनि और गणेश जी की मूर्ति स्थापित हैं। नीलकंठ महादेव मंदिर की सामने की पहाड़ी पर भगवान शिव की पत्नी “पार्वती” जी को समर्पित एक मंदिर है।

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