lord shiva temple Archives - THE HIMALAYAN DIARY

भगवान शिव को पाने के लिए हरिद्वार के इस स्थान पर माता पार्वती ने की थी तपस्या

यहां रहने के दौरान माता पार्वती को पीने के पानी की समस्या आती थी। ऐसे में देवताओं के निवेदन करने पर स्वयं परमपिता ब्रह्मा ने अपने कमंडल से गंगा की जलधारा प्रकट करते थे। बिल्केश्वर महादेव मंदिर के नजदीक ही एक कुंड है, जिसे गौरी कुंड कहा जाता है।

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बागेश्वर में है प्रसिद्द बागनाथ मंदिर, यहां बाघ रूप में प्रकट हुए थे भगवान शिव

यह स्थान मार्केंडेय ऋषि की तपोभूमि रहा है। यहीं पर मार्केंडेय ऋषि ने भगवान शिव की पूजा की थी। मार्केंडेय ऋषि की पूजा से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने बाघ रूप में उन्हें दर्शन दिया था। इसी कारण इस जगह को पहले व्याघ्रेश्वर” नाम से जाना गया, जो बाद में बागेश्वर हो गया।

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चंपावत में है प्रसिद्द क्रांतेश्वर महादेव मंदिर, यहां भगवान विष्णु ने लिया था कूर्मावतार

मान्यता है कि इस स्थान पर आज भी भगवान विष्णु के पद चिन्ह विराजित है। कुर्म पर्वत का जिक्र स्कंद पुराण के मानसखंड में भी मिलता है। क्रांतेश्वर महादेव मंदिर इस क्षेत्र में रहने वाले लोगों की आस्था का केंद्र है।

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युधिष्ठिर ने की थी लाखामंडल मंदिर की स्थापना, यहां पुनः जीवित हो जाता है व्यक्ति

यह वही जगह है, जहां पर दुर्योधन ने पांडवों को मारने के लिए ‘लक्षग्रह’ का निर्माण करवाया था। कहा जाता है कि अपने अज्ञातवास के दौरान पांडव यहां आए थे। इस दौरान स्वयं युधिष्ठिर ने शिवलिंग को स्थापित किया था। इस शिवलिंग को महामंडेश्वर नाम से जाना जाता है।

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देहरादून में है प्रसिद्द टपकेश्वर महादेव मंदिर, यहां स्थित है स्वयंभू शिवलिंग

टपकेश्वर मंदिर देवताओं का निवास स्थान है। यहीं पर देवता भगवान शिव का ध्यान किया करते थे। यहां स्थित पवित्र गुफा में भगवान शिव ने देवताओं को देवेश्वर के रूप में दर्शन दिए थे। इसके बाद भगवान शिव ने ऋषियों को दर्शन दिए।

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हरिद्वार में है दक्ष महादेव मंदिर, यहां मां सती ने किया था अपने जीवन का त्याग

दक्ष महादेव मंदिर में भगवान शिव जी की मूर्ति लैंगिक रूप में विराजित है। मंदिर में भगवान विष्णु के पांव के निशान भी मौजूद है। मंदिर परिसर में एक छोटा सा गड्डा भी है, जिसके बारे में कहा जाता है कि यहीं पर माता सती ने अपने जीवन का बलिदान दिया था।

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अद्भुत वास्तुकाला और नक्काशी के लिए प्रसिद्द है चंपावत का बालेश्वर मंदिर

इस मंदिर समूह में करीब आधा दर्जन से ज्यादा शिवलिंग स्थापित हैं। मंदिर का निर्माण 12वीं शताब्दी के शासकों द्वारा करवाया गया था। यह मंदिर अपनी वास्तुकला के लिए भी प्रसिद्द है। मंदिर की वास्तुकाला और नक्काशी इसके प्राचीन होने के साक्ष्य हैं।

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मुस्लिम गडरिए ने की थी अमरनाथ गुफा की खोज, जानिए पूरी कहानी

हिन्दू धर्म के बीच आस्था के केंद्र अमरनाथ गुफा की खोज करीब 500 साल पहले एक कश्मीरी मुसलमान बूटा मलिक ने की थी। बूटा मलिक पेशे से गड़रिए थे और पहाड़ पर ही भेड़-बकरियां चराते थे। एक दिन जंगल में उनकी मुलाकात एक साधु से हुई और दोनों की दोस्ती हो गई।

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दुनिया का सबसे बड़ा शिव मंदिर है पंच केदारों में से एक तुंगनाथ मंदिर

तुंगनाथ मंदिर का नाम भगवान राम से भी जुड़ा हुआ है। मान्यता है कि रावण का वध करने के बाद भगवान राम ने ब्रह्माहत्या के श्राप से मुक्ति पाने के लिए यहां आकर भगवान शिव की तपस्या की थी। तभी से इस स्थान को ‘चंद्रशिला’ नाम से भी जाने जाना लगा।

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सोलन में स्थित है भगवान शिव को समर्पित एशिया का सबसे ऊंचा मंदिर

स्वामी कृष्णानंद परमहंस ने इस पवित्र धार्मिक स्थल पर भगवान शिव की घोर तपस्या की और त्रिशूल के प्रहार से जमीन में से पानी निकाला। इसके बाद से कभी भी जटोली में पानी समस्या नहीं हुई। लोग इस पानी को बहुत ही पवित्र मानते हैं।

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