हिमाचल प्रदेश के मंडी जिला क्षेत्र में धुंध का प्रकोप, वाहनों की रफ़्तार पर पड़ रहा है असर

सर्दी के चलते मंडी जिला के बल्ह, नाचन और सुंदरनगर में चारों और धुंध फैली हुई है। धुंध के कारण क्षेत्र का एयर इंडेक्स भी नीचे गिर गया है। धुंध का सबसे ज्यादा असर वाहन चालकों पर देखा जा रहा है। धुंध के कारण जहां एक तरह गाड़ियों के रफ़्तार पर असर पड़ा है, वहीँ दूसरी ओर दिन के समय भी वाहनों की लाइटें जला कर वहां चलाने पड़ रहे है।

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चमत्कारिक ममलेश्वर मंदिर में पांडव काल से अब तक जल रहा है अग्निकुंड

ममलेश्वर महादेव मंदिर में पांडवों से जुड़ी कई तरह की निशानियां आज भी मौजूद हैं। इन निशानियों को देखने और भगवान शिव-माता पार्वती के दर्शन करने के लिए यहां बड़ी संख्या में भक्त पहुंचते हैं। यहां देश-विदेश से पर्यटक भी पहुंचते हैं।

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अद्भुत खूबसूरती और रहस्यमयी धार्मिक स्थलों के लिए प्रसिद्द है मंडी की करसोग घाटी

करसोग घाटी को अनूठी लोक-संस्कृति, पारंपरिक रीति-रिवाज, ऐतिहासिक मंदिरों, सेब के बगीचों और कई तरह के पेड़ो के लिए जाना जाता हैं। यहां का अद्भुत सौंदर्य देखते ही बनता है। करसोग में मौजूद मंदिरों का संबंध महाभारत के काल से माना जाता हैं।

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प्राकृतिक खूबसूरती और ऐतिहासिक मंदिरों का शहर है हिमाचल प्रदेश का मंडी

मंडी में हिंदू धर्म के 300 से भी ज्यादा मंदिर स्थित हैं। इनमे से ज्यादातर भगवान शिव और माता काली को समर्पित हैं। पंचवक्रता मंदिर, अर्द्धनारीश्‍वेर मंदिर और त्रिलोकनाथ मंदिर यहां के प्रमुख मंदिरों में से एक है। मंडी में स्थित भूतनाथ मंदिर यहां का सबसे प्राचीन मंदिर है। इसका निर्माण 1520 ई। में किया गया था।

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मंडी में है चमत्कारिक शिकारी देवी मंदिर, कोई नहीं बना पाया मंदिर की छत

मंदिर में स्थित माता की मूर्ति खुले आसमान के नीचे स्थापित है। यानि मंदिर में छत नहीं बनी हुई है। आश्चर्य की बात यह है कि इस मंदिर में कई बार छत लगाने का प्रयास किया गया, लेकिन माता की शक्ति के प्रभाव से कभी भी इस मंदिर की छत निर्माण का कार्य पूरा नहीं हो पाया।

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पर्यटन के क्षेत्र में सराजघाटी को मलेगी नई पहचान, मुख्यमंत्री ने किया टूरिस्ट कल्चर सेंटर का शिलान्यास

इस सेंटर की खास बात यह है कि इसका निर्माण प्राचीन शैली में किया जाएगा। इससे यहां आने वाले पर्यटकों को टूरिस्ट कल्चर सेंटर आकर प्राचीन शैली को करीब से जानने का मौका मिलेगा। प्राचीन शैली से बने इन कमरों में पर्यटक सकून के पल भी बिता सकेंगे। इस प्रोजेक्ट के शिलान्यास के दौरान जयराम ठाकुर ने कहा कि टूरिस्ट कल्चर सेंटर के बनने से सराजघाटी को पर्यटन के क्षेत्र में एक नई पहचान मिलेगी। उन्होंने बताया कि सरकार इस दिशा में प्रयासरत है कि कुल्लू-मनाली और शिमला को छोड़कर अन्य अनछुए स्थलों पर भी पर्यटक पहुंचें। जिन अनछुए पर्यटन स्थलों का जिस तरीके से विकास करने की जरूरत है, उस पर्यटन स्थल को उसी तरीके से विकसित करने की योजना सरकार ने बना ली है।

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हिमाचल के मंडी में हुआ दैवीय चमत्कार, सड़क निर्माण के दौरान प्रकट हुआ शिवलिंग

जेसीबी आपरेटर ने बताया कि इस काम को करने का दौरान मशीन में काफी खराबी आ रही थी, लेकिन जब शिवलिंग देखा तो तुरंत प्रभाव से काम करना बंद कर दिया। पहाड़ से शिवलिंग निकलने की बात धीरे-धीरे पूरे इलाके में फ़ैल गई और शिवलिंग के दर्शन करने के लिए वहां भारी संख्या में लोग पहुंचने लगे। लोग इसे देवीय चमत्कार मानकर शिवलिंग की पूजा अर्चना करने लगे। जल्द ही वहां पर धूप जलाने और पुष्प अर्पित करने से लेकर चढ़ावा तक चढ़ाने का क्रम शुरू हो गया हैं।

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पर्यटकों को आकर्षित करने के लिए मंडी में 50 करोड़ की मदद से किए जाएंगे पर्यटन विकास कार्य

जयराम ठाकुर के अनुसार पैसा स्वीकृति होते ही इस दिशा में कार्य शुरू कर दिया जाएगा। इस योजना के तहत शहर के साथ बहने वाली ब्यास नदी पर कृत्रिम झील का निर्माण और अन्य कई पर्यटन सुविधाओं का विकास किया जाएगा। सरकार की इस योजना से मंडी में वॉटर टूरिज्म बढ़ेगा और लोगों को आकर्षण का केंद्र बनेगा। मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने मंडी में जिमनेजियम निर्माण के लिए ऊर्जा मंत्री अनिल शर्मा के निवेदन पर 25 लाख रुपये देने का ऐलान भी किया। मुख्यमंत्री ने कहा कि जहां पर भी उचित स्थान मुहैया हो वहां पर इसका निर्माण किया जाएगा। इसके अलावा मुख्यमंत्री ने मंडी की सडकों को साफ़ रखने के लिए 3 करोड़ रुपए देने की घोषणा भी की है।

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रंग-बिरंगी मछलियाें और तैरने वाले टापुआें से मशहूर यह झील

मंडी में इन खूबसूरत इलाकों के साथ ही यहां की झीलें अपनी विशेषताओं के चलते सैलानियों को आस्था और रोमांच से पूरी तरह सराबोर कर देती हैं। यह झीलें भारत के पर्यटन मानचित्र में अपनी दमदार दस्तक दे चुकी हैं। रिवालसर की सुन्दर मन माेह लेने बाली झील तीन धर्मों हिन्दू, बौद्ध और सिखों का सांझा तीर्थस्थल है। यह झील तैरने वाले टापुओं के लिए मशहूर है। इस झील में रंग-बिरंगी बेशुमार मछलियां हैं, जिन्हें यहां पहुंचने वाला हर श्रद्धालु चारा डालकर पुण्य कमाता है।

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