इस वर्ष नहीं होगी किन्नर कैलाश यात्रा, प्रशासन ने लिया निर्णय

यात्रा के दौरान खराब मौसम, बर्फ से ढके रास्तों, ग्लेशियर व क्षतिग्रस्त वन हट्स को लेकर चर्चा की गई, जिसके बाद इस वर्ष किन्नर कैलाश यात्रा को रद्द करने का फैसला लिया गया है।

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श्रीखंड महादेव यात्रा के लिए अंतिम जत्था रवाना

श्रीखंड यात्रा ट्रस्ट के उपाध्यक्ष ने जानकारी देते हुए बताया कि यात्रा पर लगभग 4800 श्रद्धालु रवाना हुए हैं। प्रशासन ने यात्रा पर गए श्रद्धालुओं की सुविधाओं का विशेष ध्यान रखा है।

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छोटी काशी में श्रावण महोत्सव में उमड़े श्रद्धालु, एक महीने चलेगा अखंड जाप

मंदिर के गर्भ में रूद्राभिषेक व दोनों समय पूजा व आरती का विशेष महत्व है। श्रावण मास महोत्सव के दौरान एकादश रूद्र मंदिर में रोजाना विशाल भंडारे का आयोजन भी किया जाता है।

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इस साल श्रीखंड महादेव के दर्शन नहीं कर पाएंगे श्रद्धालु, प्रशासन ने लगाई रोक

प्रशासन ने श्रीखंड महादेव की यात्रा शुरू होने के तीसरे ही दिन बुधवार को यात्रा पर आंशिक तौर पर रोक लगा दी थी और पंजीकरण प्रक्रिया भी रोक दी थी।

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श्रीखंड महादेव यात्रा की हुई शुरुआत, दुर्गम और खतरनाक रास्तें से गुजरते हैं श्रद्धालु

सोमवार को प्रदेश के कुल्लू के आनी से इस दुर्गम यात्रा की शुरूआत हो गई है। आमतौर पर 15 दिनों तक चलने वाली यह यात्रा इस साल 15 जुलाई से 25 जुलाई तक आयोजित की जा रही है।

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लक्ष्मण झूला बंद होने के बाद कांवड़ यात्रा को लेकर नया रूट तैयार

नए रूट के तहत पैदल चलने वाले कांवड़िए रामझूला पुल से प्रवेश करेंगे और मौनी बाबा होते हुए नीलकंठ पहुंचेंगे। दर्शन करने के बाद कांवड़िए मौनी बाबा से बैराज मार्ग होते हुए वापसी करेंगे।

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मणिमहेश जाने वालों के लिए खुशखबरी, श्रद्धालुओं के लिए खुला कुगती पास

जोबरंग से मणिमहेश झील तक पहुंचने के लिए श्रद्धालुओं को करीब चार दिनों तक ट्रेकिंग करना पड़ती है। इस दौरान श्रद्धालुओं को पथरीले और ऊबड़खाबड़ रास्तों से होकर गुजरना पड़ता है।

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केदारनाथ धाम में उमड़ा भक्तों का सैलाब, पैदल यात्रा का मजा उठा रहे हैं श्रद्धालु

इस साल 24 जून तक ही करीब 447748 श्रद्धालु 17 किलोमीटर की पैदल दूरी तय कर धाम पहुंच चुके हैं, जबकि पिछले साल 347504 श्रद्धालु ही पैदल धाम पहुंचे थे।

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DDRF की टीम ने किया चोराबाड़ी ताल का दौरा, केदारनाथ धाम को कोई खतरा नहीं

डीडीआरएफ की टीम का कहना है कि यहां जो झीलनुमा पानी जमा है, वह ग्लेशियर क्षेत्र में है और इससे केदारनाथ धाम को किसी भी तरह का कोई खतरा नहीं है।

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जिस ताल की वजह से केदारनाथ धाम में हुई थी तबाही, उसमें फिर से भरा पानी

यह ताल अब छह साल बाद फिर से पुनर्जीवित हो रहा है। इस ताल में एक बार फिर से पानी भर गया है। चोराबाड़ी ताल के चारो तरफ ग्लेशियर फैला है और यह टुकड़ों में टूट रहा है।

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