अद्भुत प्राकृतिक खूबसूरती के बीच स्थित है सिखों का पवित्र स्थल श्री हेमकुंड साहिब

श्री हेमकुंड साहिब गुरुद्वारा जितना पवित्र स्थान है, उतना ही खूबसूरत भी है। ऐसा लगता है जैसे प्रकृति ने दिल खोल कर इस जगह पर अपनी खूबसूरती लुटाई है।

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पंच बद्री में से एक है वृद्ध बद्री मंदिर, भगवान विष्णु ने दिए थे वृद्ध रूप में दर्शन

वृद्ध बद्री मंदिर में भगवान विष्णु की मूर्ति एक बूढ़े व्यक्ति के रूप में स्थापित है, यहीं कारण है कि इस धार्मिक स्थल को वृद्ध बद्री मंदिर के नाम से जाना जाता है। बद्री, भगवान विष्णु का एक नाम है।

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भगवान शिव को पाने के लिए हरिद्वार के इस स्थान पर माता पार्वती ने की थी तपस्या

यहां रहने के दौरान माता पार्वती को पीने के पानी की समस्या आती थी। ऐसे में देवताओं के निवेदन करने पर स्वयं परमपिता ब्रह्मा ने अपने कमंडल से गंगा की जलधारा प्रकट करते थे। बिल्केश्वर महादेव मंदिर के नजदीक ही एक कुंड है, जिसे गौरी कुंड कहा जाता है।

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बागेश्वर में है प्रसिद्द बागनाथ मंदिर, यहां बाघ रूप में प्रकट हुए थे भगवान शिव

यह स्थान मार्केंडेय ऋषि की तपोभूमि रहा है। यहीं पर मार्केंडेय ऋषि ने भगवान शिव की पूजा की थी। मार्केंडेय ऋषि की पूजा से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने बाघ रूप में उन्हें दर्शन दिया था। इसी कारण इस जगह को पहले व्याघ्रेश्वर” नाम से जाना गया, जो बाद में बागेश्वर हो गया।

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चंपावत में है प्रसिद्द क्रांतेश्वर महादेव मंदिर, यहां भगवान विष्णु ने लिया था कूर्मावतार

मान्यता है कि इस स्थान पर आज भी भगवान विष्णु के पद चिन्ह विराजित है। कुर्म पर्वत का जिक्र स्कंद पुराण के मानसखंड में भी मिलता है। क्रांतेश्वर महादेव मंदिर इस क्षेत्र में रहने वाले लोगों की आस्था का केंद्र है।

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युधिष्ठिर ने की थी लाखामंडल मंदिर की स्थापना, यहां पुनः जीवित हो जाता है व्यक्ति

यह वही जगह है, जहां पर दुर्योधन ने पांडवों को मारने के लिए ‘लक्षग्रह’ का निर्माण करवाया था। कहा जाता है कि अपने अज्ञातवास के दौरान पांडव यहां आए थे। इस दौरान स्वयं युधिष्ठिर ने शिवलिंग को स्थापित किया था। इस शिवलिंग को महामंडेश्वर नाम से जाना जाता है।

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कोटद्वार में है चमत्कारिक सिद्धबली मंदिर, पूरी होती है भक्तों की हर मनोकामना

यहां टीले पर बहुत समय पहले एक बाबा भगवान हनुमान की पूजा किया करते थे। हनुमान जी ने उन्हें दिव्य सिद्धि प्रदान की थी। इसी के चलते बाबा को सिद्धबली बाबा कहा जाने लगा था।

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पौड़ी में है भगवान यमराज की तपस्थली क्यूंकालेश्वर महादेव मंदिर

सोमवार और सावन के महीने में यहां विशेषतौर पर श्रद्धालु पहुंचते है। धार्मिक पर्यटन के लिहाज से इस स्थान के विशेष महत्व है। यह धार्मिक स्थल चारों तरफ से बांज, बुरांश, चीड़ तथा देवदार के पेड़ों से घिरा हुआ है। यहां से प्रकृति के मनमोहक नज़ारे के भी दर्शन होते है।

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कला-संस्कृति की अनमोल धरोहर है प्रकृति की गोद में बसा महासू देवता का मंदिर

मंदिर में एक पवित्र ज्योति है जो सालों से जल रही है। मंदिर के गर्भ गृह से पानी की एक धारा भी निकलती है, लेकिन वह कहां से निकलती है और वह कहां जाती है यह आज तक पता नहीं चल पाया है। दिलचस्प बात है कि महासू देवता के मंदिर में हर साल राष्ट्रपति भवन से नमक आता है।

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महाप्रलय के दौरान केदारनाथ धाम में प्रकट हुई थी दिव्य भीम शिला

जब मन्दाकिनी नदी चारों ओर तबाही मचा रही थी उसी दौरान केदारनाथ धाम मंदिर के ठीक पीछे एक विशाल शिला प्रकट हुई जिन्होंने मंदिर को मन्दाकिनी की चोटों से बचा लिया।

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