हिमाचल प्रदेश के हमीरपुर में है दिव्य सिद्ध पीठ बाबा बालक नाथ मंदिर

बाबा बालकनाथ जी हिन्दू आराध्य हैं, जिनको उत्तर-भारतीय राज्य हिमाचल प्रदेश, पंजाब, दिल्ली में बहुत श्रद्धा से पूजा जाता है। ऐसे में दियोटसिद्ध स्थित इस बालक नाथ सिद्ध धाम में उत्तर भारत से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं।

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हिमाचल प्रदेश की खूबसूरत नगरी पौंटा साहिब में है प्रसिद्द देई का मंदिर

देई का मंदिर के बारे में कहा जाता है कि इस धार्मिक स्थल का निर्माण सिरमौर के तत्कालीन राजा की बहन ने करवाया था। यह मंदिर हिंदू भगवान श्री राम जी और सूर्यवंशी शासकों के परिवार के देवता को समर्पित है।

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बद्रीनाथ धाम के पास व्यास गुफा में गणेश जी ने लिखी थी महाभारत

यह वही गुफा है, जहां पर महर्षि वेद व्यास जी ने महाभारत को बोला था और भगवान गणेश ने उसे लिखा था। हिमालय की सघन वादियों के बीच स्थित इस गुफा में वेद व्यास जी जैसा-जैसा बोलते गए और भगवान गणेश उसे लिखते रहें। इस तरह पवित्र महाकाव्य महाभारत की रचना हुई।

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मनाली में हिंदू धर्म के प्रमुख सप्त ऋषियों में से एक ऋषि वशिष्ठ का है मंदिर

मंदिर परिसर में गर्म पानी का प्राकृतिक स्त्रोत भी है। तीर्थ यात्री दर्शन करने से पूर्ण यहां स्नान करते हैं। गर्म पानी ठंड में भी यहां श्रद्धालु नहाते हैं। प्राकृतिक स्त्रोत को लेकर लोगों की मान्यता है कि इसमें नहाने से चर्म रोग की समस्या दूर हो जाती है।

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शिमला के हसीं नजारों के बीच स्थित है प्रसिद्ध संकट मोचन मंदिर

गणेश मंदिर की डिजाइन दक्षिण भारतीय वास्तुकला शैली को प्रदर्शित करती है। यह जगह इतनी शांत और सुंदर है कि यहां पहुंच कर आपके कष्ट और संकट अपने-आप ही दूर होते महसूस होने लगते हैं। यहां हर रोज बड़ी संख्या में श्रद्धालु पधारते हैं।

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चार धाम और पंच केदारों में से एक है रूद्रप्रयाग में स्थित केदारनाथ मंदिर

भगवान शिव को समर्पित यह विशाल मंदिर भूरे रंग के कटवां पत्थरों के विशाल शिलाखंडों को जोड़कर बनाया गया है। मंदिर का निर्माण लगभग 6 फुट ऊंचे चबूतरे पर किया गया है। केदारनाथ मंदिर में स्थित ज्योतिर्लिंग की ऊंचाई 3584 मीटर है।

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शक्तिपीठ सुरकंडा देवी से नजर आता है चारों धामों की पहाड़ियों का दुर्लभ दृश्य

घने जंगलों से घिरे हुए इस प्रसिद्द धार्मिक स्थल से हिमालय का खूबसूरत नजारा देखने को मिलता है। इसके अलावा यहां से बद्रीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री और यमनोत्री अर्थात चारों धामों की पहाड़ियों का दुर्लभ नजारा देखने को मिलता है।

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ऋषिकेश के त्रिवेणी घाट पर होता है गंगा, यमुना और सरस्वती नदी का संगम

जरा नामक एक शिकारी के तीर से चोट लगने के बाद भगवान श्री कृष्ण यहां आए थे। इस स्थान को भगवान कृष्ण का अंतिम संस्कार स्थल भी माना जाता है। यहां आने वाले तीर्थ यात्री इस जगह पर अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए पिंड श्राद्ध नामक “कर्मकांड” भी करते हैं।

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पांडुकेश्वर में है योग ध्यान बद्री मंदिर, यहीं हुआ था पांडवों का जन्म

माना जाता है कि भगवान विष्णु की कांस्य की प्रतिमा को इस स्थान पर महाभारत के नायक पांच पांडवों के पिता राजा पांडु ने स्थापित किया था। कई लोगों का मानना है कि यह वहीँ स्थान है जहां पर पांडव पैदा हुए थे और राजा पांडु ने इस स्थान पर मोक्ष प्राप्त किया था।

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देहरादून में है प्रसिद्द टपकेश्वर महादेव मंदिर, यहां स्थित है स्वयंभू शिवलिंग

टपकेश्वर मंदिर देवताओं का निवास स्थान है। यहीं पर देवता भगवान शिव का ध्यान किया करते थे। यहां स्थित पवित्र गुफा में भगवान शिव ने देवताओं को देवेश्वर के रूप में दर्शन दिए थे। इसके बाद भगवान शिव ने ऋषियों को दर्शन दिए।

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