प्रकृति के सौंदर्य के बीच किश्तवाड़ में स्थित है मां दुर्गा का चमत्कारिक मंदिर

मान्यता है कि प्राचीन समय में जब भी किसी शासक ने लद्दाख या अन्य क्षेत्र में चढ़ाई की तो उसने इस मार्ग से गुजरते हुए मचैल माता मंदिर में आकर आशीर्वाद जरुर लिया था।

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अद्भुत प्राकृतिक खूबसूरती के बीच स्थित है सिखों का पवित्र स्थल श्री हेमकुंड साहिब

श्री हेमकुंड साहिब गुरुद्वारा जितना पवित्र स्थान है, उतना ही खूबसूरत भी है। ऐसा लगता है जैसे प्रकृति ने दिल खोल कर इस जगह पर अपनी खूबसूरती लुटाई है।

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चंबा में है भलेई माता का अनोखा मंदिर, मूर्ति को आता है पसीना

स्थानीय मान्यता के अनुसार मां की मूर्ति पर अगर पसीना आ जाए तो मंदिर में मौजूद सभी भक्तोंं की मनोकामना जरुर पूरी होती है। ऐसे में श्रद्धालु घटों तक मंदिर में बैठकर मूर्ति पर पसीना आने का इंतजार करते हैं।

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Dharamshala में है अघंजर महादेव मंदिर, भगवान शिव ने अर्जुन को दिया था पशुपति अस्त्र

अघंजर महादेव मंदिर को लेकर मान्यता है कि अज्ञातवास के दौरान पांडव यहां आए थे। इस दौरान पांडु पुत्र अर्जुन ने भगवान श्रीकृष्ण के कहने पर यहां भगवान शिव की तपस्या की थी और उनसे एक अस्त्र प्राप्त किया था।

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पंच बद्री में से एक है वृद्ध बद्री मंदिर, भगवान विष्णु ने दिए थे वृद्ध रूप में दर्शन

वृद्ध बद्री मंदिर में भगवान विष्णु की मूर्ति एक बूढ़े व्यक्ति के रूप में स्थापित है, यहीं कारण है कि इस धार्मिक स्थल को वृद्ध बद्री मंदिर के नाम से जाना जाता है। बद्री, भगवान विष्णु का एक नाम है।

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जम्मू के ऐतिहासिक बाहु किले के अंदर है चमत्कारी बावे वाली माता का मंदिर

राजा ने हाथियों की सहायता से देवी की मूर्ती के मुंह को अपने महल की ओर करने की कोशिश की, लेकिन जैसे ही हाथी मूर्ती को खींचते हाथी दर्द के मारे चिंघाड़ने लगते। ऐसे में राजा ने मूर्ती को यहीं स्थापित रहने देने का फैसला किया।

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भगवान शिव को पाने के लिए हरिद्वार के इस स्थान पर माता पार्वती ने की थी तपस्या

यहां रहने के दौरान माता पार्वती को पीने के पानी की समस्या आती थी। ऐसे में देवताओं के निवेदन करने पर स्वयं परमपिता ब्रह्मा ने अपने कमंडल से गंगा की जलधारा प्रकट करते थे। बिल्केश्वर महादेव मंदिर के नजदीक ही एक कुंड है, जिसे गौरी कुंड कहा जाता है।

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बागेश्वर में है प्रसिद्द बागनाथ मंदिर, यहां बाघ रूप में प्रकट हुए थे भगवान शिव

यह स्थान मार्केंडेय ऋषि की तपोभूमि रहा है। यहीं पर मार्केंडेय ऋषि ने भगवान शिव की पूजा की थी। मार्केंडेय ऋषि की पूजा से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने बाघ रूप में उन्हें दर्शन दिया था। इसी कारण इस जगह को पहले व्याघ्रेश्वर” नाम से जाना गया, जो बाद में बागेश्वर हो गया।

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श्रीखंड महादेव यात्रा की हुई शुरुआत, दुर्गम और खतरनाक रास्तें से गुजरते हैं श्रद्धालु

सोमवार को प्रदेश के कुल्लू के आनी से इस दुर्गम यात्रा की शुरूआत हो गई है। आमतौर पर 15 दिनों तक चलने वाली यह यात्रा इस साल 15 जुलाई से 25 जुलाई तक आयोजित की जा रही है।

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प्रकृति की गोद में बसा है प्रसिद्ध मंकी पॉइंट, यहां पड़े थे हनुमान जी के पांव

मंकी पॉइंट पर आकर पर्यटक खुद को प्रकृति के बीच महसूस करते हैं। इस स्थान से सतलुज नदी, चंडीगढ़ और बर्फ ढकी से चूर चांदनी चोटी के दर्शन होते हैं।

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