King Sahil Verman sacrificed eight sons to obtain the rare marble for Lakshmi Narayan Temple

Located in Chamba of Himachal Pradesh, the huge and ancient temple of Laxmi Narayan is said to be constructed during 10th century. The king of this territory namely Sahil Verman had built this temple between 920 AD and 940 AD. It is the oldest temple of Chamba and was built in the Shikhara style of architecture.

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विष्णु गंगा और अलकनंदा नदी के संगम पर मौजूद है विष्णुप्रयाग

यह वही स्थान है जहां पर नारद मुनि ने अष्टाक्षरी जप कर भगवान विष्णु को प्रसन्न किया था। नारद मुनि से प्रसन्न होकर भगवान विष्णु स्वयं उन्हें दर्शन देने के लिए इस स्थान पर प्रकट हुए थे। विष्णुप्रयाग में भगवान विष्णु का प्राचीन मंदिर और विष्णु कुण्ड है।

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सोलन में है ऐतिहासिक शूलिनी देवी का मंदिर, दर्शन मात्र से मिलती है सुख-समृद्धि

भक्त माता शूलिनी को दिव्या माता, आदि-परा शक्ति , महाशक्ति , लता देवी जैसे नामों से भी जानते हैं। भक्तों का विश्वास है कि माता शूलिनी की सच्चे मन से आराधना करने से घर में सुख-समृद्धि और खुशहाली आती है।

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पिथौरागढ़ में है प्रसिद्ध गुरना माता मंदिर, अपने भक्तों की करती हैं रक्षा

भक्तों का विश्वास है कि माता के मंदिर में जो भी व्यक्ति सच्चे मन से प्रार्थना करता है उसकी सभी मनोकामना जरुर पूरी होती हैं. भक्तों के बीच गुरना देवी मंदिर की मान्यता जम्मू कश्मीर के प्रसिद्द ‘वैष्णो देवी मंदिर’ के समान है.

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जम्मू के सुध महादेव मंदिर में आज भी मौजूद है भगवान शिव का खंडित त्रिशूल

इस स्थल को बाबा रूप नाथ के स्थल के तौर पर भी जाना जाता है। बाबा रूप नाथ की धूनी या ‘अनन्त लौ’ अभी भी लगातार जल रही है और इसे आज भी मंदिर में देखा जा सकता है। जून की पूर्णिमा की रात को यहां विशेष तौर पर भारी संख्या में भक्त आते हैं।

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रानीखेत में है मां झूला देवी का मंदिर, आज भी करती है अपने भक्तों की रक्षा

एक दिन एक चरवाहे को सपने में देवी दुर्गा ने दर्शन दिये और एक विशेष स्थान पर खुदाई कर मूर्ति निकालने के संकेत दिए। जब चरवाहे ने उस स्थान पर खुदाई की तो उस स्थान पर मूर्ति निकली। इसके बाद उस स्थान पर ही मूर्ति की स्थापना कर एक मंदिर का निर्माण किया गया था।

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टिहरी गढ़वाल में स्थित है प्राकृतिक खूबसूरती से भरपूर प्रसिद्द हिल स्टेशन कनाताल

धार्मिक और प्राकृतिक स्थलों का मजा लेने के अलावा कनाताल में आप रोमांचक एडवेंचर गतिविधियों का आनंद भी उठा सकते है। विश्व के उच्चतम बांधों में से एक टेहरी बांध, कनाताल के मुख्य आकर्षण में से एक है। कनाताल के कोडाई जंगल में पर्यटक ट्रैकिंग का मजा ले सकते हैं।

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पार्वती घाटी में बसा है ऐतिहासिक धार्मिक स्थल मणिकर्ण साहिब

मणिकर्ण साहिब गुरूद्धारे को लेकर लोगों की मान्यता है कि गुरू नानक देव जी ने अपनी यात्रा के दौरान सबसे पहले इसी जगह पर ध्यान लगाया था। मणिकर्ण दो शब्द मणि और कर्ण से मिलकर बना हुआ हैं। मणि का मतलब बेशकीमती पत्थर और कर्ण का मतलब कान होता है।

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हरिद्वार में है प्रमुख शक्तिपीठ माया देवी मंदिर, होती है सारी मनोकामना पूरी

इस मंदिर में धार्मिक अनुष्ठान के साथ ही तंत्र साधना भी की जाती है। माया देवी के मंदिर में माता की मूर्ति के चार भुजा और तीन मुंह हैं। मूर्ति के बायें हाथ पर देवी काली और दायें हाथ पर देवी कामाख्या की मूर्ति हैं। माया देवी मंदिर के साथ ही यहां भैरव बाबा का मंदिर भी मौजूद है।

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चमोली में है शिव का प्राचीनतम धाम, दर्शन मात्र से ही दूर हो जाते हैं कष्ट

गोपेश्वर मंदिर अपनी वास्तुकला के लिए भी जाना जाता है। मंदिर का गर्भगृह 30 वर्ग फुट का है। गोपीनाथ धाम प्रसिद्द चार मंदिरों तुंगनाथ, अनसुया देवी, रुद्रनाथ और बद्रीनाथ से घिरा हुआ है। मंदिर के गर्भगृह में भव्य शिवलिंग और उसके सामने माता पार्वती की प्रतिमा विराजमान है।

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