जम्मू के सुध महादेव मंदिर में आज भी मौजूद है भगवान शिव का खंडित त्रिशूल

इस स्थल को बाबा रूप नाथ के स्थल के तौर पर भी जाना जाता है। बाबा रूप नाथ की धूनी या ‘अनन्त लौ’ अभी भी लगातार जल रही है और इसे आज भी मंदिर में देखा जा सकता है। जून की पूर्णिमा की रात को यहां विशेष तौर पर भारी संख्या में भक्त आते हैं।

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रानीखेत में है मां झूला देवी का मंदिर, आज भी करती है अपने भक्तों की रक्षा

एक दिन एक चरवाहे को सपने में देवी दुर्गा ने दर्शन दिये और एक विशेष स्थान पर खुदाई कर मूर्ति निकालने के संकेत दिए। जब चरवाहे ने उस स्थान पर खुदाई की तो उस स्थान पर मूर्ति निकली। इसके बाद उस स्थान पर ही मूर्ति की स्थापना कर एक मंदिर का निर्माण किया गया था।

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टिहरी गढ़वाल में स्थित है प्राकृतिक खूबसूरती से भरपूर प्रसिद्द हिल स्टेशन कनाताल

धार्मिक और प्राकृतिक स्थलों का मजा लेने के अलावा कनाताल में आप रोमांचक एडवेंचर गतिविधियों का आनंद भी उठा सकते है। विश्व के उच्चतम बांधों में से एक टेहरी बांध, कनाताल के मुख्य आकर्षण में से एक है। कनाताल के कोडाई जंगल में पर्यटक ट्रैकिंग का मजा ले सकते हैं।

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पार्वती घाटी में बसा है ऐतिहासिक धार्मिक स्थल मणिकर्ण साहिब

मणिकर्ण साहिब गुरूद्धारे को लेकर लोगों की मान्यता है कि गुरू नानक देव जी ने अपनी यात्रा के दौरान सबसे पहले इसी जगह पर ध्यान लगाया था। मणिकर्ण दो शब्द मणि और कर्ण से मिलकर बना हुआ हैं। मणि का मतलब बेशकीमती पत्थर और कर्ण का मतलब कान होता है।

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हरिद्वार में है प्रमुख शक्तिपीठ माया देवी मंदिर, होती है सारी मनोकामना पूरी

इस मंदिर में धार्मिक अनुष्ठान के साथ ही तंत्र साधना भी की जाती है। माया देवी के मंदिर में माता की मूर्ति के चार भुजा और तीन मुंह हैं। मूर्ति के बायें हाथ पर देवी काली और दायें हाथ पर देवी कामाख्या की मूर्ति हैं। माया देवी मंदिर के साथ ही यहां भैरव बाबा का मंदिर भी मौजूद है।

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चमोली में है शिव का प्राचीनतम धाम, दर्शन मात्र से ही दूर हो जाते हैं कष्ट

गोपेश्वर मंदिर अपनी वास्तुकला के लिए भी जाना जाता है। मंदिर का गर्भगृह 30 वर्ग फुट का है। गोपीनाथ धाम प्रसिद्द चार मंदिरों तुंगनाथ, अनसुया देवी, रुद्रनाथ और बद्रीनाथ से घिरा हुआ है। मंदिर के गर्भगृह में भव्य शिवलिंग और उसके सामने माता पार्वती की प्रतिमा विराजमान है।

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रुद्रप्रयाग में है कार्तिक स्वामी मंदिर, निसंतान दंपति की कामना होती है पूरी

कार्तिक स्वामी का मंदिर भगवान शिव के ज्येष्ठ पुत्र कार्तिकेय जी को समर्पित है। यह मंदिर भगवान कार्तिक को समर्पित उत्तराखंड का एकमात्र मंदिर है। शक्तिशाली हिमालय की श्रेणियों से घिरा हुआ यह क्षेत्र समुद्र की सतह से 3048 मीटर की ऊँचाई पर स्थित है।

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अल्मोड़ा में स्थित है बारह ज्योतिर्लिंगों का उद्गम स्थल जागेश्वर मंदिर

जब गांव के पुरुषों को पता चला कि एक तपस्वी ने गांव की महिलाओं को आकर्षित कर लिया है तो वह उग्र हो उठे और भगवान शिव को खोजने लगे। इस स्थिति को नियंत्रित करने के लिए भगवान शिव ने एक बच्चे का रूप धारण कर लिया। तभी से यहां पर शिव के बाल रूप की पूजा होती है।

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पिथौरागढ़ की पाताल भुवनेश्वर गुफा में रखा है गणेश जी का कटा हुआ सिर

इस गुफा के अंदर चारों युग के प्रतिक के रूप में चार पत्थर भी स्थापित हैं। इनमें से एक पत्थर जो कि कलयुग का प्रतिक है, वह धीरे-धीरे ऊपर उठ रहा है। माना जाता है कि जिस दिन यह पत्थर दीवार से टकरा जायेगा, उस दिन कलियुग का अंत हो जाएगा।

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जोशीमठ के करीब स्थित है भविष्य का बद्रीनाथ मंदिर

यह मंदिर पांच बद्री तीर्थों में से एक है। मान्यता है कि भविष्य में ख़राब मौसम के कारण बद्रीनाथ तीर्थ तक पहुंचना असंभव हो जाएगा। ऐसे में फिर इसी स्थान को बद्रीनाथ के विकल्प के रूप में पूजा जाएगा। यही कारण है कि इस जगह को भविष्य बद्री मंदिर कहा जाता है।

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