हाईटेक तकनीक से तैयार होगा ऋषिकेश का नया लक्ष्मणझूला पुल, दिखेगी केदारनाथ मंदिर की झलक

नए लक्ष्मणझूला पुल पर केदारनाथ मंदिर के दोनों किनारों पर लिफ्ट लगेगी। इसमें बैठकर 20 मीटर ऊपर मंदिर के शीर्ष छोर तक पहुंचा जा सकेगा। यहां से दूरबीन के माध्यम से ऋषिकेश को निहारा जा सकेगा।

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देहरादून-हरिद्वार-ऋषिकेश में जाम से राहत दिलाएगा ‘रैपिड ट्रांजिट सिस्टम’

देहरादून-हरिद्वार-ऋषिकेश का रूट साल के बारह महीने व्यस्त रहता है। खासतौर से वेकेशन के समय यहां पर्यटकों को कई घंटे सिर्फ जाम में ही बिताने पड़ते हैं। इसे देखते हुए उत्तराखंड में परिवहन सेवाओं के विस्तार की कवायद जारी की गई है।

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2000 साल से भी अधिक पुराना है ऋषिकेश का यह मंदिर, अपने आप बजने लगती हैं घंटियां

मंदिर का इतिहास 2000 साल से पुराना बताया जाता है। सावन के महीने में यहां सैकड़ों श्रद्धालु भगवान शिव की आराधना करने पहुंचते हैं। मान्यता है कि यहां सच्चे मन से मांगी गई मनोकामना जरूर पूरी होती है।

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ऋषिकेश में लक्ष्मण झूला का विकल्प बनेगा ‘कांच का पुल’, यह थी बंद करने की वजह

12 जुलाई 2019, उत्तराखंड के अपर मुख्य सचिव की ओर से एक आदेश जारी किया गया, जिसके बाद लक्ष्मण झूला पुल को बंद कर दिया गया। खतरे की आशंका को देखते हुए विशेषज्ञों की टीम ने सुझाव दिया कि इसे बंद करना ही बेहतर है।

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लक्ष्मण झूला बंद होने के बाद कांवड़ यात्रा को लेकर नया रूट तैयार

नए रूट के तहत पैदल चलने वाले कांवड़िए रामझूला पुल से प्रवेश करेंगे और मौनी बाबा होते हुए नीलकंठ पहुंचेंगे। दर्शन करने के बाद कांवड़िए मौनी बाबा से बैराज मार्ग होते हुए वापसी करेंगे।

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ऋषिकेश का प्रसिद्द लक्ष्मण झूला जनता के लिए बंद, सुरक्षा को देखते हुए लिया निर्णय

पुल के अधिकांश पुर्जे और अन्य सामान खराब हो चुके है। पुल ढहने की स्थिति में है। ऐसे में पुल को जल्द ही यात्रियों के लिए बंद किया जाना चाहिए। ऐसा नहीं करने पर यहां बड़ा हादसा हो सकता है।

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ऋषिकेश के त्रिवेणी घाट पर होता है गंगा, यमुना और सरस्वती नदी का संगम

जरा नामक एक शिकारी के तीर से चोट लगने के बाद भगवान श्री कृष्ण यहां आए थे। इस स्थान को भगवान कृष्ण का अंतिम संस्कार स्थल भी माना जाता है। यहां आने वाले तीर्थ यात्री इस जगह पर अपने पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए पिंड श्राद्ध नामक “कर्मकांड” भी करते हैं।

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ऋषिकेश का प्राचीन स्थल है भरत मंदिर, एकल शालिग्राम से बनी है प्रतिमा

इस मंदिर की स्थापना आदि गुरु शंकराचार्य ने 12वीं शताब्दी में की थी। आदि गुरु शंकराचार्य द्वारा रखा गया श्रीयंत्र भी इस मंदिर में है। मंदिर के गर्भगृह में भगवान विष्णु की प्रतिमा स्थापित है। यह प्रतिमा एकल शालिग्राम पत्थर पर उकेरी गई है। यह पत्थर नेपाल के गंडकी नदी में पाया जाता है।

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ऋषिकेश में है नीलकंठ महादेव का मंदिर, यहीं किया था भगवान शिव ने विषपान

मंदिर के मुख्य द्वार पर द्वारपालो की प्रतिमा बनी हैं। मंदिर परिसर में कपिल मुनि और गणेश जी की मूर्ति स्थापित हैं। नीलकंठ महादेव मंदिर की सामने की पहाड़ी पर भगवान शिव की पत्नी “पार्वती” जी को समर्पित एक मंदिर है।

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हरिद्वार-ऋषिकेश-अमृतसर-वैष्णोदवी की यात्रा के लिए IRCTC लेकर आया शानदार टूर पैकेज

यह यात्रा भारत दर्शन स्पेशल टूरिस्ट ट्रेन में स्लीपर क्लास से होगी। इस दौरान यात्रियों को ब्रेकफास्ट, लंच और डिनर दिया जाएगा। इसके अलावा ठहरने के लिए धर्मशाला में व्यवस्था की जाएगी। यात्रियों को पीने के पानी के रूप में पैक्ड ड्रिंकिंग वाटर दिया जाएगा। लोकल एरिया में लोकेशन घुमाने के लिए गाड़ी की सुविधा होगी। ट्रेन में यात्रियों की सुरक्षा के लिए ट्रेन में सिक्योरिटी टीम होगी। इस पूरे पैकेज के लिए एक यात्री को मात्र 7560 रुपए चुकाना होगा।

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देवों की भूमि है ऋषिकेश, जहां ऐसे एन्जॉय करते हैं टूरिस्ट

पिछले कुछ सालों में यह जगह एक बेहतर पर्यटन के केंद्र के रूप में बनकर उभरी है। रिवर रॉफ्टिंग हो या फिर मौज मस्ती युवा को यहां पर वो सब चीजें मिलती हैं जो ना सिर्फ उनके वीकेंड में चार चांद लगाती हैं बल्कि उनके दिलों-दिमाग को फ्रेश कर देती है।

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