shakti peeth Archives - THE HIMALAYAN DIARY

शक्तिपीठ सुरकंडा देवी से नजर आता है चारों धामों की पहाड़ियों का दुर्लभ दृश्य

घने जंगलों से घिरे हुए इस प्रसिद्द धार्मिक स्थल से हिमालय का खूबसूरत नजारा देखने को मिलता है। इसके अलावा यहां से बद्रीनाथ, केदारनाथ, गंगोत्री और यमनोत्री अर्थात चारों धामों की पहाड़ियों का दुर्लभ नजारा देखने को मिलता है।

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जम्मू-कश्मीर के लद्दाख में स्थित है प्रसिद्द धार्मिक स्थल श्री पर्वत शक्तिपीठ

श्री पर्वत शक्तिपीठ में शक्ति को देवी सुन्दरी और भैरव को सुन्दरानन्द के रूप में पूजा जाता है। हालांकि इस शक्तिपीठ के मूल स्थान को लेकर मतभेद है। कुछ लोगों कि इसे लद्दाख में मानते हैं, तो कुछ असम के सिलहट से 4 कि।मी। दक्षिण-पश्चिम में जौनपुर में मानते हैं।

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उत्तराखंड के अल्मोड़ा में स्थित है गोपनीय शक्तिपीठ द्रोणागिरी वैष्णवी

द्रोणागिरी वैष्णवी शक्तिपीठ में प्राकृतिक रूप से निर्मित सिद्ध पिण्डियों की माता भगवती के रूप में पूजा की जाती है। मान्यता है कि मंदिर में जो भी भक्त सच्चे मन से आता हैं, उसकी मनोकामना जरुर पूरी होती है। माता के मंदिर पवित्र अखंड ज्योति जल रही है।

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51 शक्तिपीठों में से एक है मां ब्रजेश्वरी देवी मंदिर, दर्शन मात्र से दूर होते है कष्ट

मां ब्रजेश्वरी के मंदिर में तीन गुंबद है। पहला गुंबद हिन्दू धर्म, दूसरा गुंबद मुस्लिम धर्म और तीसरा गुंबद सिख धर्म का प्रतिक माना जाता है। यही कारण है कि माता के इस पवित्र मंदिर में हिन्दू ही नहीं बल्कि मुस्लिम और सिख धर्म के श्रद्धालु भी पूजा करने के लिए आते हैं।

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कांगड़ा में है प्रसिद्ध शक्तिपीठ चामुंडा देवी मंदिर, हर मनोकामना होती है पूरी

धर्मशाला से लगभग 15 किलोमीटर दूर स्थित चामुंडा देवी मंदिर का वातावरण काफी शांत है। मंदिर परिसर में एक छोटा-सा तालाब स्थित है। इस तालाब के पानी को बहुत ही पवित्र माना जाता है। मंदिर परिसर में ही एक खोखली भी है, जो देखने में शिवलिंग जैसी प्रतीत होती है।

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उत्तराखंड के टिहरी जिले में स्थित है प्रसिद्द सिद्धपीठ मां कुंजापुरी देवी मंदिर

मां कुंजापुरी देवी मंदिर भक्तों की अटूट आस्था का केन्द्र है। मान्यता है कि यहां आने वाले सभी भक्तों की मनोकामनायें जरुर पूर्ण होती हैं। मंदिर के गर्भ गृह में कोई प्रतिमा नहीं है बल्कि एक गड्ढा है। माना जाता है कि यहीं वह स्थान है जहां माता सती का कुंजा गिरा था।

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हरिद्वार के नील पर्वत पर स्थित है प्रसिद्द शक्तिपीठ चंडी देवी मंदिर

यह मंदिर हिन्दू धर्म की आस्था के प्रतिक 52 शक्तिपीठों में से एक है। इसे कश्मीर के तत्कालीन शासक द्वारा वर्ष 1929 में बनवाया गया था। मंदिर में स्थित मुख्य मूर्ति की स्थापना 8वीं सदी में हिन्दू धर्म के सबसे बड़े पुजारियों में से एक आदि शंकराचार्य ने की थी।

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हरिद्वार के मनसा देवी मंदिर में पूरी होती हैं भक्तों के मन की हर कामना

मनसा देवी का मन्दिर अत्यन्त प्राचीन और सिद्धपीठों में से एक है। मंदिर में स्थित एक मूर्ति के पांच मुख और दस भुजाएं हैं, जबकि एक अन्य मूर्ति की अठारह भुजाएं और एक मुख हैं। इनके पति का नाम जगत्कारु और पुत्र का नाम आस्तिक जी है।

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हरिद्वार में है प्रमुख शक्तिपीठ माया देवी मंदिर, होती है सारी मनोकामना पूरी

इस मंदिर में धार्मिक अनुष्ठान के साथ ही तंत्र साधना भी की जाती है। माया देवी के मंदिर में माता की मूर्ति के चार भुजा और तीन मुंह हैं। मूर्ति के बायें हाथ पर देवी काली और दायें हाथ पर देवी कामाख्या की मूर्ति हैं। माया देवी मंदिर के साथ ही यहां भैरव बाबा का मंदिर भी मौजूद है।

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