प्राकृतिक खूबसूरती से लबरेज एक अद्भुत धार्मिक स्थल है जोशीमठ

यहां प्राकृतिक खूबसूरती, धार्मिक यात्रा के साथ-साथ पर्यटक कई तरह की एडवेंचर गतिविधियों का आनंद भी ले सकते हैं। अपने परिवार और दोस्तों के साथ इस कम भीड़ वाले खूबसूरत हिल स्टेशन पर आप आदर्श समय बिता सकते हैं।

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पहाड़ियों के बीच स्थित पिथौरागढ़ का बेहद खूबसूरत हिल स्टेशन है अस्कोट

प्राकृतिक खूबसूरती के अलावा अस्कोट अपने कस्तूरी मृगों के लिए प्रसिद्ध है। इस वजह से ही इन हिरणों की सुरक्षा के लिए यहां असकोट कस्तूरी मृग अभ्यारण का निर्माण किया गया है। अभ्यारण्य के ठीक सामने गरखा की उपजाऊ ढलानें हैं, जबकि इसके बायीं ओर नेपाल की पहाड़ियां और काली नदी है।

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एडवेंचर लवर्स के लिए स्वर्ग के सामान है खीरगंगा, मनमोहक है यहां की दिलकश खूबसूरती

मान्यता है कि भगवान शिव की कृपा से किसी समय यहां खीर निकलती थी। एक दिन जब परशुराम ने देखा कि लोग इस खीर को खाने के लालच में बावले हुये जा रहे हैं तो उन्होंने श्राप दे दिया कि अब यहां से कोई खीर नहीं निकलेगी। माना जाता है कि इसके बाद से यहां से खीर निकलना बंद हो गई थी। लेकिन आश्चर्य की बात है कि आज भी दूध की मलाई जैसी चीज गरम खौलते पानी के साथ निरंतर निकलती रहती है।

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सौंदर्य से परिपूर्ण हिमाचल प्रदेश के सबसे प्रमुख हिल स्टेशन में से एक है परवाणू

हिमाचल प्रदेश और हरियाणा के पंचकुला शहर की सीमा रेखा के बीच में बसे होने के कारण परवाणू को बार्डर टाउन के नाम से भी जाना जाता है। परवाणू को एक औद्योगिक शहर के रूप में पहचाना जाता है क्यों कि यहां पर कई बड़े-बड़े कारखाने और उद्योग स्थापित है।

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प्रकृति की खूबसूरत वादियों के बीच स्थित एक आदर्श पर्यटन स्थल है गुशैनी

गुशैनी को ट्राउट देश भी कहा जाता है, क्योंकि यह ट्राउट मछली पकड़ने के लिए एक लोकप्रिय स्थान है। यहां प्रचुर मात्रा में ट्राउट मछली उपलब्ध हैं। गुशैनी मछली पकड़ने के अवसरों को प्रदान करता है। कुल मिलाकर प्रकृति से प्यार करने वालों के लिए यह एक आदर्श स्थल है।

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प्रकृति से है प्यार तो एक बार जरूर आएं पहलगाम की बेताब घाटी

अगर आप प्रकृति से प्यार करते हो तो फिर यह आपके लिए एक आदर्श स्थल है। प्रकृति प्रेमी इस स्थल की खूबसूरती से प्रभावित हुए बिना नहीं रह सकते। हरे-भरे नर्म घास के मैदान और बर्फीली चोटियों से घिरी हुई यह आकर्षक घाटी पहलगाम और चंदनवाड़ी के बीच पड़ती है।

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लंबे इंतजार के बाद पर्यटकों के लिए खोले गए राजाजी टाइगर रिजर्व की मोतीचूर रेंज के गेट

हर साल राजाजी टाइगर रिजर्व की मोतीचूर रेंज का गेट 15 नवंबर को खोला जाता है, लेकिन इस वर्ष निर्धारित तिथि से 13 दिनों की देरी से 28 नवंबर को खोला गया है। दरअसल मोतीचूर रेंज में टाइगर शिफ्टिंग प्रोजेक्ट चल रहा है, जिसके कारण राजाजी टाइगर रिजर्व की मोतीचूर रेंज को पर्यटकों के लिए देरी से खोला गया। हालांकि मोतीचूर रेंज के कई हिस्से अभी भी ऐसे हैं, जहां पर्यटकों की आवाजाही बंद है।

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प्रकृति को करीब महसूस करने के लिए आदर्श स्थल है ग्रेट हिमालयन नेशनल पार्क

यहां आकर पर्यटक भूरे भालू, औबेक्स, काले भालू, कस्तूरी मृग, हिम तेंदुए की दुर्लभ प्रजातियों और हिमालयन थार जैसे पशुओं को देख सकते हैं। यहां सैकड़ों दुर्लभ पशुओं का बसेरा है। दुर्लभ प्रजाति के सुगंधित और औषधीय गुणों से भरपूर पौधे भी यहां मौजूद हैं। यहां बड़ी संख्या में तेंदुएं पाएं जाते हैं।

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लोगों के विश्वास और आस्था का प्रतीक है चमत्कारिक संतला देवी मंदिर

मुगलों से लड़ते-लड़ते जब संतला देवी और उनके भाई को एहसास हुआ कि वे मुगलों से लड़ने में सक्षम नहीं हैं, तो उन्होंने इसी स्थान पर अपने दोनों हथियार फेंक दिये और प्रार्थना शुरू कर दी। उसी समय चारों ओर दिव्य प्रकाश फैला और वह दोनों पत्थर की मूर्तियों में बदल गये।

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पर्यटकों को आकर्षित कर रहा है राजाजी नेशनल पार्क का टाइगर रिजर्व, तीन गुना हुई बाघों की संख्या

राजाजी नेशनल पार्क प्रबंधन ने अनुमान जताया है कि जिस तरह से पार्क में बाघों की संख्या में इजाफा हो रहा है, उसे देखते हुए अगले साल तक इनकी संख्या 50 का आंकड़ा पार कर जाएगी। प्रबंधन के अनुसार यहां केवल बाघ ही नहीं, बल्कि दूसरे मांसाहारी और शाकाहारी वन्यजीवों की संख्या भी तेजी से बढ़ी हैं। वन्यजीवों को देखने के लिए राजाजी नेशनल पार्क आने वाले पर्यटकों की संख्या में भी तेजी से इजाफा हो रहा हैं।

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