हर मुराद पूरी होती है पिथौरागढ़ के इस मंदिर में, व्यू पाइंट से दिखता है खूबसूरत नजारा

कामख्या देवी मंदिर की स्थापना 1972 में मदन मोहन शर्मा के प्रयासों से हुई थी। 1972 में मदन मोहन शर्मा ने जयपुर से छः सिरोंवाली मूर्ति लाकर यहां स्थापित की थी। कामाख्या देवी को नारीत्व के प्रतीक के रूप में भी जाना जाता है।

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Pangot, a small village of Uttrakhand provides shelter to more than 150 bird species

Located at 17 kms away from a well known beautiful place of Nainital in Uttarakhand, a small village namely Pangot contains in itself the amazing beauty of nature. Being a home for more than 150 species of birds, this village is said to be the paradise for bird lovers. These beautiful species of birds include Himalayan griffon, rufous-bellied woodpecker, blue-winged minla, spotted and slaty-backed forktail, rufous-bellied niltavas, khalij pheasant and many more.

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17 अगस्त को उत्तराखंड के दयारा बुग्याल में मनाया जाएगा ‘बटर फेस्टिवल’

उत्तरकाशी में स्थित दयारा बुग्याल समुद्र तल से 11 हजार फीट की ऊंचाई पर स्थित है। यहां हर साल प्रसिद्ध “बटर फेस्टिवल” मनाया जाता है, जिसे स्थानीय भाषा में अंढूड़ी उत्सव कहा जाता है।

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चकराता में दिखाई देता है खूबसूरत नजारा, मॉनसून में करें घूमने का प्लान

चकराता, देहरादून जिले में एक छावनी शहर है​ जो कि टोंस और यमुना नदियों के बीच है। चकराता को कर्नल ह्यूम और उनके सहयोगी अधिकारियों ने बसाया था।

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हसीन वादियों से घिरा खूबसूरत पर्यटन स्थल है उत्तराखंड का Srinagar

शहरों की चिलचिलाती धूप से दूर श्रीनगर में आप अपने परिवार के साथ अच्छा समय बिता सकते हैं। सर्दियों के मौसम में यहां हल्की बर्फबारी होती है।

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प्रकृति की गोद में बसा एक खूबसूरत पर्यटन स्थल है देहरादून का कलसी

कलसी में स्थित डक पत्थर यहां का खूबसूरत और लोकप्रिय पिकनिक स्पॉट है. यहां आकर पर्यटक कैनोइंग, नौकायन, वाटर स्कीइंग और होवरक्राफ्ट जैसी मनोरंजन गतिविधियों का आनंद ले सकता हैं. कलसी में बहने वाली यमुना नदी प्रदुषण रहित है.

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उत्तराखंड के टिहरी जिले में स्थित है प्रसिद्द सिद्धपीठ मां कुंजापुरी देवी मंदिर

मां कुंजापुरी देवी मंदिर भक्तों की अटूट आस्था का केन्द्र है। मान्यता है कि यहां आने वाले सभी भक्तों की मनोकामनायें जरुर पूर्ण होती हैं। मंदिर के गर्भ गृह में कोई प्रतिमा नहीं है बल्कि एक गड्ढा है। माना जाता है कि यहीं वह स्थान है जहां माता सती का कुंजा गिरा था।

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प्राकृतिक सौंदर्य के बीच टोंस नदी के किनारे स्थित एक आदर्श पर्यटन स्थल है मोरी

बहती हुई टोंस नदी, हरे-भरे धान के खेत, खूबसूरत झीलें और देवदार के पेड़ मोरी को एक आदर्श हिल स्टेशन बनाते हैं। मोरी में एशिया का सबसे लंबा देवदार का जंगल स्थित है। मोरी सिर्फ प्राकृतिक संपदा के लिए ही प्रसिद्द नहीं है बल्कि इसे प्राचीन मंदिरों और बेहतरीन वास्तुशिल्प के लिए भी जाना जाता हैं।

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ट्रैकिंग के लिए जन्नत है प्राकृतिक सौंदर्य और रोमांच से भरपूर उत्तरकाशी का डोडीताल

डोडीताल में मां अन्नपूर्णा का मंदिर भी है जिसमें मां अन्नपूर्णा के दर्शन करने के बाद पर्यटक डोडीझील का लुफ्त उठाते है। कई लोगों का मानना है कि यहां पर भगवान गणेश का जन्म हुआ था, इसलिए डोडीताल झील को गणेशताल भी कहते हैं। यहां भगवान गणेश को समर्पित एक मंदिर भी है।

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गंगोलीहाट के इस मंदिर में साक्षात् विश्राम करती है मां कालिका देवी

मंदिर में शाम को महाआरती के बाद शक्ति के पास महाकाली का बिस्तर लगाया जाता है। जब सुबह बिस्तर को देखा जाता है तो उस पर सलवटें पड़ी रहती हैं मानों यहां साक्षात मां कालिका विश्राम करके गई हो। यह मंदिर इस क्षेत्र की लोगों की आस्था का केंद्र हैं।

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हिमालय की गोद में बसे मुक्तेश्वर में नजर आता है प्रकृति का अद्भुत सौंदर्य

मुक्तेश्वर में घुमने लायक कई आकर्षक स्थल मौजूद हैं, जिनमे मुक्तेश्वर मंदिर बहुत ही प्रसिद्द है। 350 साल पुराने भगवान शिव को समर्पित यह मंदिर एक छोटी सी पहाड़ी पर बना हुआ है। मंदिर तक पहुंचने के लिए 100 सीढ़ियां चढ़नी पड़ती हैं।

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