प्रकृति की गोद में बसा एक खूबसूरत पर्यटन स्थल है देहरादून का कलसी

कलसी में स्थित डक पत्थर यहां का खूबसूरत और लोकप्रिय पिकनिक स्पॉट है. यहां आकर पर्यटक कैनोइंग, नौकायन, वाटर स्कीइंग और होवरक्राफ्ट जैसी मनोरंजन गतिविधियों का आनंद ले सकता हैं. कलसी में बहने वाली यमुना नदी प्रदुषण रहित है.

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उत्तराखंड के टिहरी जिले में स्थित है प्रसिद्द सिद्धपीठ मां कुंजापुरी देवी मंदिर

मां कुंजापुरी देवी मंदिर भक्तों की अटूट आस्था का केन्द्र है। मान्यता है कि यहां आने वाले सभी भक्तों की मनोकामनायें जरुर पूर्ण होती हैं। मंदिर के गर्भ गृह में कोई प्रतिमा नहीं है बल्कि एक गड्ढा है। माना जाता है कि यहीं वह स्थान है जहां माता सती का कुंजा गिरा था।

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प्राकृतिक सौंदर्य के बीच टोंस नदी के किनारे स्थित एक आदर्श पर्यटन स्थल है मोरी

बहती हुई टोंस नदी, हरे-भरे धान के खेत, खूबसूरत झीलें और देवदार के पेड़ मोरी को एक आदर्श हिल स्टेशन बनाते हैं। मोरी में एशिया का सबसे लंबा देवदार का जंगल स्थित है। मोरी सिर्फ प्राकृतिक संपदा के लिए ही प्रसिद्द नहीं है बल्कि इसे प्राचीन मंदिरों और बेहतरीन वास्तुशिल्प के लिए भी जाना जाता हैं।

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ट्रैकिंग के लिए जन्नत है प्राकृतिक सौंदर्य और रोमांच से भरपूर उत्तरकाशी का डोडीताल

डोडीताल में मां अन्नपूर्णा का मंदिर भी है जिसमें मां अन्नपूर्णा के दर्शन करने के बाद पर्यटक डोडीझील का लुफ्त उठाते है। कई लोगों का मानना है कि यहां पर भगवान गणेश का जन्म हुआ था, इसलिए डोडीताल झील को गणेशताल भी कहते हैं। यहां भगवान गणेश को समर्पित एक मंदिर भी है।

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गंगोलीहाट के इस मंदिर में साक्षात् विश्राम करती है मां कालिका देवी

मंदिर में शाम को महाआरती के बाद शक्ति के पास महाकाली का बिस्तर लगाया जाता है। जब सुबह बिस्तर को देखा जाता है तो उस पर सलवटें पड़ी रहती हैं मानों यहां साक्षात मां कालिका विश्राम करके गई हो। यह मंदिर इस क्षेत्र की लोगों की आस्था का केंद्र हैं।

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हिमालय की गोद में बसे मुक्तेश्वर में नजर आता है प्रकृति का अद्भुत सौंदर्य

मुक्तेश्वर में घुमने लायक कई आकर्षक स्थल मौजूद हैं, जिनमे मुक्तेश्वर मंदिर बहुत ही प्रसिद्द है। 350 साल पुराने भगवान शिव को समर्पित यह मंदिर एक छोटी सी पहाड़ी पर बना हुआ है। मंदिर तक पहुंचने के लिए 100 सीढ़ियां चढ़नी पड़ती हैं।

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शांत पानी और सुंदर हरियाली, पिकनिक मनाने के लिए सर्वश्रेष्ठ जगह है भीमताल

भीमताल झील की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहां की प्राकृतिक खूबसूरती देखते ही बनती है। भीमताल झील की लंबाई 1674 मीटर, चौड़ाई 427 मीटर और गहराई 30 मीटर है। सवा किलोमीटर के क्षेत्र में फैली हुई इस झील के बीच में ज्वालामुखी चट्टानों से निर्मित एक छोटा सा द्वीप है।

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नौकुचियाताल में है 9 कोनों वाली अद्भुत झील, दिलकश नजारे देखने आते हैं पर्यटक

इस झील की एक और विशेषता यह भी है कि यहां कई प्रकार के विदेशी पक्षी भी रहते हैं। यहां कमल खिले रहते हैं। जंगलों के बीच स्थित इस झील के किनारे चलना, मछली पकड़ना और नौका विहार करना एक अविस्मरणीय अनुभव प्रदान करता है।

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प्राकृतिक नजारों की चाह में आने वाले टूरिस्टों के लिए स्वर्ग का द्वार है काठगोदाम

यहां कुमाऊंनी, हिंदी और गड़वाली भाषा बोली जाती है। इस खूबसूरत शहर के आस-पास घूमने के लिए कई मनमोहक जगह है। यहां शीतला देवी मंदिर, कालीचौड़ का मंदिर और गौला नदी पर बना बांध प्रमुख आकर्षण का केंद्र है।

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खूबसूरती का खजाना है धनौल्टी, सुकून की चाह में चले आते हैं पर्यटक

यहां पर्यटकों के आकर्षण का मुख्य केंद्र इको पार्क है, जो देओदर के पेड़ों से घिरा है। उत्तराखंड वन विभाग और स्थानीय नागरिकों के सहयोग से यहां दो इको पार्क बनाए गए है। इनके नाम है ‘अम्बेर’ और ‘धारा’ पार्क।

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