केदारनाथ के दर्शन बिना यात्रा निष्फल जाती है

हिन्दू धर्मानुसार चार धाम की यात्रा करना जरूरी है। इस यात्रा का आध्यात्मिक महत्व है। जिस व्यक्ति के मन में वैराग्य और धर्म की ज्योति जल रही है उसे यहां जरूर जाना चाहिए। उत्तराखंड में जब बद्रीनाथ धाम की यात्रा करते हैं तब यहां स्थित गंगोत्री, यमुनोत्री और केदारनाथ की यात्रा किए बगैर तीर्थ पूरा नहीं माना जाता। कहते हैं कि भगवान विष्णु बद्रीनाथ में स्नान करते हैं। द्वारिकाधीश में वस्त्र पहनते हैं, जगन्नाथ में भोजन करते हैं और रामेश्वरम में विश्राम करते हैं। आओ अब हम बात करते हैं केदारनाथ तीर्थ के बारे में। केदारनाथ पर्वतराज हिमालय के केदार नामक श्रृंग पर अवस्थित है। केदारनाथ धाम और मंदिर तीन तरफा पहाड़ों से घिरा है।

केदारनाथ की यात्रा करने से मनुष्य काे मुक्ति का प्राप्ती हाेती है। प्रयटक जिस भी जगह घुमने जाते हैं उन्हे उस जगह के माैसम, रहन सहन, खाने-पीने की सामग्री का पता बहुत कम हाेता है क्याेंकि यह सब प्रयटक स्थल उनके निए नई हाेती हैं। केदारनाथ की यात्रा में कैसे जाना है, क्या लेकर जाना है इस बारे में हम आपकाे बताएगें।

यात्रा में ले जाने बाले कपड़े
आपकाे बता दें कि यह यात्रा ऊंचे पहाड़ों की हैं, इसलिए आपको अपने साथ गर्मी और ठंडी दोनों के हिसाब से कपड़े रखने होंगे। अगर आप मई-जून में जा रहे हैं तो दिन में तो बिना स्वेटर के काम चल जाएगा पर रात में गरम कपड़ों की ज़रूरत पड़ेगी। इसलिए सभी यात्री कम से कम दो जोड़ी स्वेटर/जैकेट, इनर, टोपी-मफलर आदि रख लें। छोटे बच्चों के लिए दस्ताने भी रख लेना सही रहेगा।

खाने-पाने की चीजें
एसे ताे हिल स्टेशन पर खाने-पीने लगभग सारी चीजे उपलब्ध हाेती है पर फिर भी अगर आप अपने साथ घर की बनी कुछ खाने-पीने की चीजें रख सकते हैं जो आपके बहुत काम आ सकती हैं। जैसो कि ड्राई फ्रूट्स, नमकीन, आंटे के लड्डू, नीम्बू, सत्तू , हरी मिर्च, इत्यादि। वैसे पहड़ों पर पानी साफ़ होता है पर अगर आपको RO water की आदत है तो मिनरल वाटर लेना ही ठीक होगा।

रेन कोट 
पहाड़ों में अक्सर दोपहर में बारिश होने लगती है इसलिए आप रेन कोट ले लें तो बेहतर होगा। वैसे आप चाहें तो धाम पर पहुंच कर भी सिर्फ 20 रुपये से लेकर हज़ार रूपये तक के रेन कोट खरीद सकते हैं।

पॉलिथीन / पन्नी
जब आप गाडी में बैठ कर पहाड़ पर चढ़ते हैं तो आपको उल्टियाँ आ सकती हैं, ऐसे में आपके पास मौजूद पन्नियाँ बहुत काम आती हैं। कुछ लोग गाडी से सिर निकाल कर भी उल्टी कर लेते हैं पर ये ऐसा करना रिस्की हो सकता है क्योंकि वहां के रास्ते बहुत सकरे और घुमावदार होते हैं और ऐसे में गाड़ियां एक दुसरे के बहुत करीब से गुजरती हैं, इसलिए कभी हाथ या सर बाहर न निकालें।

दवाईयां
बेहतर हाेगा अगर आप अपने पास दवाईयाें का किट रखें। जैसे कि बुखार, सर दर्द, उल्टी, लूज़ मोशन इत्यादि की दवाइयां बच्चों और बड़ों के हिसाब से रख लें। पहाड़ पर यात्रा शुरू करने से आधे घंटे पहले travel sickness avoid करने के लिए एक दावा खायी जाती है, आप इसके बारे में डॉक्टर या केमिस्ट से पूछ सकते हैं।

कैदारनाथ में घुमने के लिए क्या है
केदारनाथ एक तीर्थ स्थान है जिसके दर्शनाें के लिए हर बर्ष लाखाें श्रद्धालुओं की भीड़ लगती है। केदारनाथ बारह ज्योतिर्लिंगों में एक हैं हिमालय की पर्वतश्रृंखलाओं में स्थित केदारनाथ मन्दिर एक प्रमुख तीर्थस्थल है जहां पर भगवान शिव का ज्योतिर्लिंग स्थापित है। केदारनाथ का ज्योतिर्लिंग 3584 मी की ऊंचाई पर स्थित है और बारहां ज्योतिर्लिंगों में सबसे महत्वपूर्ण है। आदि शंकराचार्य द्वारा स्थापित इस 8वीं शताब्दी के मन्दिर के पास से ही मंदाकिनी नदी बहती है। यह मन्दिर पाण्डवों ने बनाया था। प्रार्थना हॉल की आन्तरिक दीवारों पर विभिन्न हिन्दू देवी देवताओं के चित्र देखे जा सकते हैं।

मन्दिर के अन्दर गर्भगृह है जहां भगवान की पूजा की जाती है। मन्दिर परिसर के अन्दर ही एक मंडप स्थित है जहां पर विभिन्न धार्मिक समारोहों का आयोजन होता है। लोक कथाओं के अनुसार कुरूक्षेत्र के युद्ध के उपरान्त पाण्डव अपने पापों के प्रायश्चित के लिये इस मन्दिर में आये थे।

यहां कैसे पहुंचे
केदारनाथ धाम पहुंचने के लिए हरिद्वार से गौरी कुंड तक की लगभग 250 किलोमीटर की यात्रा बस द्वारा तय की जा सकती है। फिर गौरी कुंड से केदारनाथ तक की 14 किलोमीटर की यात्रा पैदल तय करनी पड़ती है।

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