उर्गम घाटी से दिखाई देता है हिमालय का खूबसूरत नजारा, स्थित है यहां पंचकेदार

वैसे तो उत्तराखंड में घूमने के लिए एक से बढ़कर बेहतरीन जगहें हैं, पर उन्हीं में से एक जगह उर्गम घाटी के बारे में बेहद कम लोग ही जानते हैं। बद्रीनाथ राजमार्ग पर हेलंग से कल्प गंगा के उद्गम तक फैली उर्गम घाटी उत्तराखण्ड की बेहद खूबसूरत घाटियों में से एक है। समुद्र तल से इसकी ऊंचाई लगभग 2080 मीटर है। यह घाटी चारों तरफ से हरे-भरे पेड़ों से घिरी हुई है। इस घाटी में सल्ला, बड़गिन्डा, उर्गम, देवग्राम, भेटा, भर्की अरोसी, पिलखी वासा, रौता सहित एक दर्जन से अधिक छोटे बड़े गांव हैं। प्राचीन मान्यताओं के अनुसार इस जगह के बारे में कहा जाता है कि महर्षि उर्ग ने इस स्थान पर तपस्या की थी, जिससे इस जगह का नाम उर्गम रखा गया। यह जगह शांत और प्राकर्तिक आध्यात्मिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है। 

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उर्गम घाटी में कल्पेश्वर मंदिर उत्तराखण्ड के प्रमुख धार्मिक स्थलों में से एक है। यह मंदिर उर्गम घाटी में समुद्र तल से लगभग 2134 मीटर की ऊंचाई पर है। यहां भगवान शिव को समर्पित एक मंदिर है, ​जिसमें भगवान शिव की जटाओं की पूजा की जाती है। कल्पेश्वर मंदिर के पुजारी देवग्राम के नेगी राजपूत हैं। जो प्रातःकाल देवग्राम के गौरा मंदिर की पूजा करने के उपरांत कल्पेश्वर की पूजा करने जाते हैं। कल्पेश्वर मंदिर को ‘पंचकेदार’ तीर्थ यात्रा में पांचवें स्थान का दर्जा हासिल है। कहा जाता है कि मां गौरा हर 12 वर्ष बाद देवग्राम जाती हैं। प्रत्येक चैत्र मास मे गौरा बड़गिडा स्थित आदिकेदार मंदिर की परिक्रमा करने भी निकलती हैं, तब इस स्थान पर भव्य मेला आयोजित होता है।

मुख्य मंदिर ‘अनादिनाथ कल्पेश्वर महादेव’ के नाम से प्रसिद्ध है। इस मंदिर के पास ही एक ‘कलेवरकुंड’ है, जहां सालभर साफ पानी मिलता है। इस कुंड के बारे में कहा जाता है कि पुराने समय में साधु यज्ञ करने के लिए इसी कुंड के पानी का उपयोग किया करते ​थे। कल्पनाथ मंदिर से 4 किलोमीटर का सफर तय कर फ्यूलानारायण पहुंचा जाता है, जहा शंकराचार्य कालीन प्राचीन मंदिर है। उर्गम घाटी के अंतिम गांव बांसा से कुछ दूरी पर प्रसिद्ध श्री वंशी नारायण मंदिर 10 किलोमीटर की दूरी पर है जहां से खूबसूरत नजारा देखने को मिलता है। 12हजार फीट की ऊंचाई पर इस स्थान पर पहुंचने के लिए बांसा से मुल्ला/तप्पड (2 किलोमीटर), कुड्मुला (1 किलोमीटर), बडजिखाल (2 किलोमीटर), नक्चुना (2 किलोमीटर) होते हुए वंशी नारायण मंदिर (3 किलोमीटर) पंहुचा जा सकता है।

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बांसा के वंशी नारायण, जंगल वाले मार्ग में तरह-तरह की जड़ी-बूटियां, भोज पत्र के पेड़, सिमरु के अनेक प्रजाति के झाडी नुमा पेड़ देखने को मिलते हैं। उर्गम गाव के श्री वंशी नारायण (10 किलोमीटर) की यह यात्रा खड़ी चढ़ाई है। मंदिर तक पहुचने के लिए बांसा से दो पहाड़ की चोटियों को पार कर तीसरे पहाड़ में ऊंचाई तक पहुंचना होता है। यहां आने पर एक अलग ही नजारा देखने को मिलता है, जहां चारों तरफ शांत माहौल होता है।

कैसे पहुंचें
रामनगर यहां से सबसे नजदीक रेलवे स्टेशन है, जिसकी दूरी तकरीबन 233 किलोमीटर है। यहां से ऋषिकेश रेलवे स्टेशन 247 किलोमीटर की दूरी पर है। उर्गम घाटी तक पहुंचने के लिए ऋषिकेश, देहरादून और हरिद्वार से बस सेवा उपलब्ध है।

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