रुद्रप्रयाग में है कोटेश्वर महादेव मंदिर, भगवान शिव ने यहां ली थी शरण

कोटेश्वर महादेव मंदिर को लेकर मान्यता है कि केदारनाथ जाते समय भगवान शिव ने यहां पर साधना की थी। यहां स्थित मूर्ति प्राकृतिक रूप से स्थापित है।

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देवरिया ताल पर देखने को मिलता है प्रकृति का अद्भुत और खूबसूरत नजारा

देवरिया ताल से प्रकृति का अद्भुत और खूबसूरत नजारा देखने को मिलता है। यहां आने वाले पर्यटक नौका विहार, कांटेबाजी और विभिन्न दुर्लभ पक्षियों को देखने का आनंद ले सकते हैं। इस प्राकृतिक खूबसूरत झील को देखने के लिए सालभर पर्यटकों का आना जाना लगा रहता है।

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उखीमठ पहुंचे भगवान केदारनाथ का भक्तों ने किया भव्य स्वागत, छः महीने तक यहीं होगी पूजा

उखीमठ में केदारनाथ की पंचमुखी उत्सव मूर्ति को परंपरागत पूजा अर्चना के साथ मंदिर के गर्भ गृह में रखा गया। इसी के साथ बाबा केदारनाथ की पंचमुखी मूर्ति को ओंकारेश्वर मंदिर मे विराजमान कराया गया और शीतकालीन पूजाएं शुरू हो गई। श्री बदरीनाथ केदारनाथ मन्दिर समिति के सदस्य ने जानकारी देते हुए बताया कि केदारनाथ मंदिर के कपाट बंद होने के बाद सेना की जेकलाई रेजीमेंट के बैंड की धुनों पर केदारनाथ की डोली वहां से निकली।

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रुद्रप्रयाग के खूबसूरत पर्यटन स्थल चंद्रशिला में होते है प्रकृति के अद्भुत सौंदर्य के दर्शन

यही वह जगह है जहां भगवान राम ने रावण का वध करने के बाद तपस्या की थी। इसके अलावा एक कथा यह भी है कि इस स्थान पर चंद्र देव ने अपना प्रायश्चित संपादित किया था। यहां आने वाले पर्यटक यहां के अद्भुत नजारों के अलावा स्केटिंग, स्कीइंग और पर्वतारोहण जैसी गतिविधियों का भी आनंद ले सकते हैं।

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सर्दियों में रुद्रप्रयाग के उखीमठ में होती है भगवान केदारनाथ की पूजा

सर्दियों के मौसम में केदारनाथ मंदिर और मध्यमहेश्वर से मूर्तियों को उखीमठ लाया जाता हैं। इसके अलावा यह स्थान पंच केदार का भी मुख्य पड़ाव भी है। यहीं पर राजा मान्धाता की तपस्या से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उन्हें ओंकार रूप में दर्शन दिए थे।

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रुद्रप्रयाग में है कार्तिक स्वामी मंदिर, निसंतान दंपति की कामना होती है पूरी

कार्तिक स्वामी का मंदिर भगवान शिव के ज्येष्ठ पुत्र कार्तिकेय जी को समर्पित है। यह मंदिर भगवान कार्तिक को समर्पित उत्तराखंड का एकमात्र मंदिर है। शक्तिशाली हिमालय की श्रेणियों से घिरा हुआ यह क्षेत्र समुद्र की सतह से 3048 मीटर की ऊँचाई पर स्थित है।

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रुद्रप्रयाग के गुप्तकाशी में है भगवान शिव के दो अद्भुत मंदिर

यहां एक अन्य प्रसिद्ध मंदिर “अर्धानाश्र्वर” भी है। यहां भगवान शिव आधे पुरुष और आधे महिला के रूप में विराजमान है। हिन्दू धर्म के लोगों के बीच इस स्थान को छोटा चार-धाम के रूप में भी जाना जाता है। अर्धानाश्र्वर मंदिर के सामने मणिकर्णिका कुंड भी है।

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रुद्रप्रयाग के त्रियुगीनारायण मंदिर में हुआ था शिव-पार्वती का विवाह

कथाओं के अनुसार यह स्थल पहले ‘हिमवत’ की राजधानी था। मान्यता है कि माता पार्वती ने यहां राजा हिमवत की पुत्री के रूप में जन्म लिया था। उन्होंने भगवान शिव के सामने विवाह का प्रस्ताव रखा, लेकिन भगवान शिव ने उनके प्रस्ताव को अस्वीकार कर दिया।

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