Dharamshala में है अघंजर महादेव मंदिर, भगवान शिव ने अर्जुन को दिया था पशुपति अस्त्र

Aghanjar Mahadev Temple

देवों की भूमि कहे जाने वाले हिमाचल प्रदेश के कांगड़ा जिले में धर्मशाला से लगभग 10 किलोमीटर दूर धौलाधार की तलहटी में बसे खनियारा गांव में भगवान शिव का ऐतिहासिक धार्मिक स्थल मौजूद है। पहाड़ों और जंगलों से घिरे इस धार्मिक स्थल को अघंजर महादेव मंदिर (Aghanjar Mahadev Temple) के नाम से जाना जाता है। इस मंदिर का इतिहास बाबा गंगा भारती समेत महाराजा रणजीत सिंह व पांडु पुत्र अर्जुन से जुड़ा हुआ है। इस मंदिर को लेकर मान्यता है कि इसकी स्थापना महाभारत काल में हुई थी। अघंजर महादेव मंदिर में भगवान शिव के दर्शन करने के लिए तीर्थयात्रियों के अलावा बहुत से पर्यटक भी पहुंचते हैं। खासकर सावन के महीने में यहां आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या में बड़ा इजाफा देखने को मिलता है।

अघंजर का मतलब होता है पाप का नष्ट हो जाना। अघंजर महादेव मंदिर को लेकर मान्यता है कि अज्ञातवास के दौरान पांडव यहां आए थे। इस दौरान पांडु पुत्र अर्जुन ने भगवान श्रीकृष्ण के कहने पर यहां भगवान शिव की तपस्या की थी और उनसे एक अस्त्र प्राप्त किया था। राज-पाठ भोगने के बाद अर्जुन वापस इस स्थान पर आए थे और इस स्थान पर भगवान शिव के मंदिर का निर्माण करवाया। एक अन्य कथा के अनुसार एक बार महाराजा रणजीत सिंह बीमार हो गए तो बाबा गंगा भारती ने उनका इलाज किया था। इससे खुश होकर महाराजा रणजीत सिंह ने बाबा गंगा भारती को अपना दुसाला भेंट किया। इस पर बाबा गंगा भारती ने दुसाला को अपने हवनकुंड में डाल दिया और सौ दुसाले निकाल महाराजा रणजीत सिंह को अपना दुसाला पहचानने को कहा। इस पर महाराजा बाबा गंगा भारती के चरणों में गिर पड़े।

 

अघंजर महादेव मंदिर धौलाधार पर्वत श्रंखला की तलहटी में धर्मशाला से लगभग 10 किलोमीटर की दूरी है। यहां की प्राकृतिक खूबसूरती भी मंदिर की तरह अनोखी है। मंदिर के पीछे एक छोटा झरना भी है, जिससे लगातार पानी बहता है। लगभग 500 साल पुराने इस धार्मिक स्थल के आसपास ठंडी हवा, शांति और शांत वातावरण है। मंदिर के नजदीक एक अन्य प्रमुख आकर्षण सिद्धपुर में बौद्ध नोरबुलिंगका मठ है। अघंजर महादेव मंदिर में हमेशा धुनी जलती रहती है, जिसके बारे में कहा जाता है कि इसे अर्जुन जलाया था।

कैसे पहुंचें Aghanjar Mahadev Temple

यह धार्मिक स्थल धर्मशाला से महज 10 किलोमीटर की दूरी पर है। धर्मशाला से अघंजर महादेव मंदिर पहुंचने के लिए टैक्सी या अन्य वाहन उपलब्ध हैं। दिल्ली से धर्मशाला के लिए सीधी वॉल्वो बस सेवा के अलावा सामान्य बस सेवाएं भी उपलब्ध हैं। दिल्ली के अलावा, चंडीगढ़, जम्मू, शिमला से भी नियमित बस सेवाएं हैं। यहां का नजदीकी एयरपोर्ट गग्गल है। जिसकी यहां से दूरी करीब 15 किलोमीटर है। नजदीकी रेलवे स्टेशन पठानकोट है। जहां से धर्मशाला करीब 85 किलोमीटर की दूरी पर है। सड़क मार्ग से यहां चंडीगढ़, कीरतपुर होते हुए पहुंचा जा सकता है। दिल्ली से धर्मशाला की दूरी लगभग 520 किलोमीटर है। दिल्ली से बस से आना हो, तो कश्मीरी गेट बस टर्मिनल से हिमाचल रोडवेज की बसें मिलती हैं।

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(Religious Places from The Himalayan Diary)

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